जयंतिया नेशनल काउंसिल ने मेघालय सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया है, जिसमें उन्होंने लुम सिरमन क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट से पहले किसानों और भूमि मालिकों के अधिकारों को सुरक्षित करने की मांग की है।
मुख्य बातें
- जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) ने सरकार को 10 दिनों की समय सीमा दी है।
- ₹1,800 करोड़ की प्रस्तावित सीमेंट और चूना पत्थर खनन परियोजना पर विरोध जारी है।
- स्थानीय समुदायों ने भूमि स्वामित्व और आजीविका के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है।
- सार्वजनिक सुनवाई में बाधा डालने के आरोप लगाते हुए पारदर्शिता की मांग की गई है।
मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के लुम सिरमन क्षेत्र में प्रस्तावित ₹1,800 करोड़ की एकीकृत सीमेंट संयंत्र और चूना पत्थर खनन परियोजना एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। एक प्रमुख स्वदेशी समुदाय के शीर्ष निकाय, जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) ने मेघालय सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले भूमि मालिकों और किसानों के अधिकारों की गारंटी दी जानी चाहिए।
गुरुवार को, JNC के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री कॉनराड के. सांगमा को एक ज्ञापन सौंपा। संगठन के महासचिव वानश्व सुटिंग के नेतृत्व में, समूह ने श्री सीमेंट लिमिटेड की 217.394 हेक्टेयर की प्रस्तावित परियोजना के संबंध में तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की। उनका तर्क है कि सुतंगा और नोंगखलीह इलाका (पारंपरिक प्रशासनिक इकाइयाँ) के निवासियों के रीति-रिवाज, कब्जे और खेती के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल औद्योगिक विकास का नहीं, बल्कि संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण का है। यदि सरकार स्थानीय समुदायों के भूमि रिकॉर्ड और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहती है, तो यह क्षेत्र में दीर्घकालिक सामाजिक अशांति पैदा कर सकता है। विकास और स्थानीय अधिकारों के बीच का यह संघर्ष मेघालय की नीतिगत दिशा के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण है।
"विकास के नाम पर स्थानीय समुदायों की आजीविका और उनके पारंपरिक भूमि अधिकारों को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।"
JNC ने आरोप लगाया कि सरकार सीमेंट कंपनियों का पक्ष ले रही है, यहाँ तक कि स्थानीय निवासियों को सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने से रोकने की कोशिश की गई है। संगठन ने मांग की है कि राजस्व, पंजीकरण और पारंपरिक रिकॉर्ड का समयबद्ध और पारदर्शी सत्यापन किया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रभावित किसानों को उचित और कानूनी मुआवजा मिले।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेघालय के पूर्वोत्तर हिस्से में खनन गतिविधियाँ हमेशा से ही स्थानीय जनजातीय स्वायत्तता और पर्यावरणीय सुरक्षा के बीच संघर्ष का विषय रही हैं। लुम सिरमन जैसे क्षेत्रों में भूमि का स्वामित्व अक्सर सामुदायिक और पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित होता है, जो आधुनिक औद्योगिक विस्तार के साथ सीधे टकराव में आता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद का मुख्य कारण ₹1,800 करोड़ की सीमेंट परियोजना से स्थानीय किसानों और भूमि मालिकों के अधिकारों के हनन की आशंका है।
2. JNC ने सरकार से क्या मांग की है?
JNC ने मांग की है कि परियोजना शुरू करने से पहले भूमि रिकॉर्ड का पारदर्शी सत्यापन किया जाए और किसानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।