मेघालय उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक समिति ने राज्य सरकार की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने अवैध कोयला खनन को रोकने और खतरनाक खदानों को बंद करने की नीति में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है।

मुख्य बातें

  • उच्च न्यायालय की समिति ने मेघालय सरकार की 'सुस्ती' की आलोचना की है।
  • अवैध रैट-होल कोयला खनन और खदानों को बंद करने की नीति में भारी देरी देखी गई है।
  • खदानों के असुरक्षित होने के कारण मानव और पशु जीवन को गंभीर खतरा बना हुआ है।
  • सूतंगा और ареंगटिम में पायलट प्रोजेक्ट्स अभी भी लंबित हैं।

गुवाहाटी: मेघालय उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष समिति ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला किया है। समिति ने रैट-होल खदानों के प्रवेश द्वारों को बंद करने और मानव एवं पशुधन के लिए खतरनाक खदानों की घेराबंदी करने की नीति अपनाने में हो रही अत्यधिक देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) बी.पी. कटाके समिति ने अपने 39वें अंतरिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि राज्य में एक व्यापक कार्ययोजना का अभाव है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने कोयला आधारित उद्योगों, विशेष रूप से कोक ओवन प्लांटों की जांच में गंभीर खामियां पाई हैं। समिति ने कहा कि वर्षों पहले दी गई सलाह के बावजूद, छोड़ी गई और अवैध रूप से संचालित खदानों को सील नहीं किया गया है, जो बच्चों और मवेशियों के लिए 'डेथ ट्रैप' साबित हो रही हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा का एक गंभीर मामला है। असुरक्षित खदानों का उपयोग न केवल दुर्घटनाओं के लिए, बल्कि अपराधियों द्वारा शवों को ठिकाने लगाने के लिए भी किया जा रहा है। यदि खदानों को तुरंत बंद नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़े पैमाने पर जनहानि हो सकती है।

अवैध खनन और नीतिगत देरी ने मेघालय के पारिस्थितिकी तंत्र और मानव जीवन दोनों को एक विनाशकारी मोड़ पर खड़ा कर दिया है।

समिति ने यह भी बताया कि सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिज़ाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड ने दो पायलट बहाली परियोजनाओं (सूतंगा और ареंगटिम) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की थी, लेकिन ये प्रस्ताव अभी भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की निगरानी समिति के पास लंबित हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने अप्रैल 2014 में मेघालय में खतरनाक रैट-होल कोयला खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में 45 से अधिक खनिकों की मौत ने यह सिद्ध कर दिया है कि अवैध खनन अभी भी राज्य में बड़े पैमाने पर जारी है।

क्या आप जानते हैं?: पूर्व जयंतिया हिल्स जिले में अकेले लगभग 60,000 खदानें हैं, जिनमें से अधिकांश पर कोई सुरक्षा कवच नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. रैट-होल माइनिंग क्या है?
यह एक प्रकार का खनन है जिसमें जमीन के नीचे संकरी सुरंगें बनाई जाती हैं, जिनमें केवल एक वयस्क व्यक्ति ही रेंग कर जा सकता है।

2. समिति ने किन जिलों की पहचान की है?
समिति ने दक्षिण पश्चिम खासी हिल्स, पश्चिम खासी हिल्स, पश्चिम जयंतिया हिल्स और पूर्व जयंतिया हिल्स में महत्वपूर्ण कमियों को उजागर किया है।