कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के निर्देशों के बाद तमिलनाडु को पानी छोड़ने के फैसले के विरोध में मैसूरु और मांड्या में किसानों ने उग्र प्रदर्शन किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि पानी छोड़ा गया तो वे सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।

मुख्य बिंदु

  • CWRC के निर्देशों के खिलाफ मैसूरु और मांड्या में किसानों का विरोध प्रदर्शन।
  • किसानों ने मांग की है कि राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे।
  • कहा गया कि KRS, काबिनी और हेमवती जैसे जलाशयों में पानी केवल पीने और फसलों के लिए पर्याप्त है।
  • हाईवे पर रैलियों और 'उरुलु सेवे' के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।

मैसूरु और मांड्या: कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) द्वारा तमिलनाडु को पानी छोड़ने के निर्देश के बाद कर्नाटक के किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। बुधवार को मैसूरु और मांड्या के विभिन्न हिस्सों में हजारों किसानों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे कावेरी के पानी को तमिलनाडु के साथ साझा करने के किसी भी प्रयास का विरोध करते हैं।

विरोध का स्वरूप और मांगें

मांड्या में किसान संगठनों और कन्नड़ संगठनों ने संजय सर्कल पर प्रदर्शन किया और पुराने बेंगलुरु-मैसूरु राजमार्ग को बाधित कर दिया। वहीं, मैसूरु में विभिन्न किसान संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर प्रदर्शन किया। राज्य गन्ना उत्पादक संघ के सदस्यों ने मैसूरु-ऊटी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों ने खाली बर्तन लेकर और अपनी बाहों पर काले बैंड बांधकर अपना आक्रोश व्यक्त किया।

किसानों ने नारेबाजी करते हुए कहा, "काबिनी और कावेरी हमारे हैं" और "पानी मत छोड़ो"। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि CWRC के आदेश के खिलाफ तुरंत एक पुनर्विचार याचिका दायर की जाए।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह विवाद केवल पानी के बंटवारे का नहीं, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा और पीने के पानी की उपलब्धता का भी है। वर्तमान में कृष्णा राजा सागर (KRS), काबिनी, हरंगी और हेमवती जैसे प्रमुख जलाशयों में जल स्तर इतना ही है कि वह केवल कर्नाटक की पीने की जरूरतों और खड़ी फसलों को बचाने के लिए पर्याप्त है।

यदि सरकार तमिलनाडु को पानी छोड़ने के साथ आगे बढ़ती है, तो किसान और विभिन्न संगठन सरकार को इसका कड़ा सबक सिखाएंगे।

कुरुबुर शांतकुमार, जो प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे, ने आरोप लगाया कि जल संसाधन मंत्री ने CWRC के सामने किसानों की वास्तविक समस्याओं को प्रभावी ढंग से नहीं रखा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगस्त में कम बारिश की संभावना को देखते हुए पानी छोड़ना जनता के हितों के साथ समझौता होगा।

क्या आप जानते हैं?: 'उरुलु सेवे' कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन का एक पारंपरिक और प्रभावशाली तरीका है, जिसमें लोग सड़क पर नृत्य और मार्च करते हुए अपना असंतोष प्रकट करते हैं।

Frequently Asked Questions

1. किसान किस आदेश का विरोध कर रहे हैं?
किसान कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) के उस निर्देश का विरोध कर रहे हैं जिसमें तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने को कहा गया है।

2. जलाशयों में पानी की वर्तमान स्थिति क्या है?
किसानों के अनुसार, प्रमुख जलाशयों में पानी केवल पीने के पानी की आपूर्ति और वर्तमान फसलों को बचाने के लिए पर्याप्त है।