विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) की नई रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 में हर साल कैंसर के नए मामलों की संख्या 2.06 करोड़ से बढ़कर 3.5 करोड़ हो सकती है, और प्रतिदिन 27,000 से अधिक लोग इस बीमारी से मृत्यु को प्राप्त होते हैं। फेफड़ों का कैंसर सबसे घातक माना गया है, जबकि आर्थिक बोझ भी चिंताजनक स्तर पर है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने 9 जुलाई 2026 को एक विस्तृत ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर प्रकाशित की, जिसमें वैश्विक स्तर पर कैंसर की बढ़ती हुई दरों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दुनिया भर में लगभग 2.06 करोड़ नए कैंसर मामलों की पहचान होगी, जबकि इस संख्या 2050 तक 3.5 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वर्तमान में कैंसर से प्रतिदिन 27,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हो रही है।
भौगोलिक एवं लिंग आधारित विभाजन
रिपोर्ट ने बताया कि एशिया में कैंसर के कुल मामलों का लगभग 51% हिस्सा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जनसंख्या आकार और जीवनशैली के परिवर्तन इस महाद्वीप को विशेष रूप से प्रभावित कर रहे हैं। पुरुषों में सबसे अधिक फेफड़ों का कैंसर पाया गया, जबकि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों की संख्या सबसे अधिक है, उसके बाद कोलन कैंसर का स्थान है। फेफड़ों के कैंसर की मुख्य वजहें धूम्रपान और बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण मानी जा रही हैं।
आर्थिक बोझ और सामाजिक असमानता
रिपोर्ट में पहली बार कैंसर रोगियों की आर्थिक स्थिति पर सर्वेक्षण शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि 45% रोगियों को उपचार के दौरान गंभीर वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई देशों में उचित समय पर निदान की कमी, स्वास्थ्य प्रणाली की असमानता और महंगे उपचार विकल्पों के कारण रोगी अक्सर उन्नत चरण में ही इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिससे मृत्यु दर में इजाफा होता है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने कहा, "कैंसर का उपचार व्यक्ति के जन्मस्थान या आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए; सभी को समान गुणवत्ता की देखभाल मिलनी चाहिए।"
रोकथाम के संभावित उपाय
WHO ने बताया कि विश्व स्तर पर कैंसर के 40% मामलों को जीवनशैली में छोटे बदलावों से रोका जा सकता है। मुख्य सिफारिशों में संतुलित आहार, नियमित शारीरिक व्यायाम, धूम्रपान एवं अत्यधिक शराब सेवन से बचना, वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना, समय पर वैक्सीन लगवाना और स्क्रीनिंग टेस्ट कराना शामिल हैं। इन उपायों को अपनाने से न केवल कैंसर की संभावना घटेगी, बल्कि रोगी की जीवन गुणवत्ता भी सुधरेगी।
भविष्य की चुनौतियां और नीति दिशा
रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कैंसर रोकथाम और उपचार के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तो आने वाले दशकों में मृत्यु दर में तेज़ी से वृद्धि होगी। इसलिए, राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का विस्तार, स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार, और शोध एवं विकास में निवेश को प्राथमिकता देना आवश्यक है। यह केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैंसर से जुड़ी आर्थिक हानि हर साल लाखों डॉलर का बोझ बनती जा रही है।