राजस्थान के जोधपुर में कई नई माताओं के अचानक बीमार पड़ने की वजह पर NDTV ने नई जांच की। सूत्रों ने बताया कि इन महिलाओं को एक नई IV ड्रिप दी गई थी, जिससे संभावित विषाक्तता का संदेह उठ रहा है।

राष्ट्रीय समाचार चैनल NDTV ने राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में माताओं की अचानक बीमारी और मृत्यु की श्रृंखला को उजागर करने वाली अपनी जाँच का दूसरा भाग जारी किया। यह रिपोर्ट विशेष रूप से जोधपुर शहर के एक प्रमुख अस्पताल पर केंद्रित है, जहाँ हाल ही में आठ नवजात माताओं को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

पृष्ठभूमि और पूर्व घटनाएँ

पिछले दो वर्षों में राजस्थान में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है। कई स्वतंत्र रिपोर्टों ने अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी, रक्त संक्रमण की अनियमितता, और अनुचित दवाओं के प्रयोग को मुख्य कारण बताया है। इस संदर्भ में, जोधपुर में हुई घटना विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि यह एक ही दिन में एक ही विभाग में कई महिलाओं को प्रभावित कर रही है।

नयी IV ड्रिप का संदिग्ध रोल

स्रोतों ने पुष्टि की कि इन माताओं को एक नई बैच की IV ड्रिप दी गई थी, जो सामान्यतः पोस्ट‑डिलीवरी के दौरान रक्त शर्करा, इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन सप्लीमेंट प्रदान करने के लिए उपयोग की जाती है। हालांकि, इस बैच की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में संभावित चूक या उत्पादन में गड़बड़ी का अनुमान लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रिप में कोई जीवाणु या विषाक्त पदार्थ मिला हो तो यह तीव्र जठरांत्रीय विकार, रक्त संक्रमण या शॉक जैसी स्थितियों को जन्म दे सकता है।

सरकारी प्रतिक्रिया और जांच प्रक्रिया

जोधपुर अस्पताल के प्रबंधक ने बताया कि घटना के बाद तुरंत सभी रोगियों को उपचारित किया गया और प्रभावित बैच को रद्द कर दिया गया। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने मामले की स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है और अस्पताल को सभी दवा स्टॉक्स की पुनः जाँच करने का आदेश दिया है। साथ ही, राज्य सरकार ने मातृ स्वास्थ्य सुधार योजना के तहत अतिरिक्त संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करने का वादा किया है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए औषधियों की ट्रेसबिलिटी, नियमित लैब परीक्षण और अस्पताल में कार्य प्रक्रियाओं की कड़ी निगरानी आवश्यक है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि माताओं को अस्पताल में भर्ती होने के दौरान वैकल्पिक उपचार विकल्पों की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे संभावित जोखिमों से अवगत हों।

जोधपुर में इस घटना का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ता दिखाई दे रहा है। यदि जांच में दवा की गड़बड़ी सिद्ध होती है, तो यह न केवल राज्य सरकार की स्वास्थ्य नीतियों को चुनौती देगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मातृ स्वास्थ्य सुधार के लिए नई नियामक पहल को प्रेरित कर सकता है।