विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि 92% लोग अपने जीवन में कैंसर का सामना करेंगे, और 2050 तक वार्षिक नए मामलों की संख्या 35 मिलियन तक पहुँच सकती है। यह आँकड़े रोग की बढ़ती सामाजिक‑आर्थिक बोझ को उजागर करते हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 92% विश्व जनसंख्या को जीवन में कैंसर का बोझ झेलना पड़ेगा
  • 2026 में 20.6 मिलियन से 2050 में लगभग 35 मिलियन वार्षिक नए केस
  • रोकथाम, समानता और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज आवश्यक

जुलाई 8 को जारी की गई WHO ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 ने यह स्पष्ट किया कि अगले 25 वर्षों में कैंसर की वैश्विक बोझ में तीव्र वृद्धि होगी। रिपोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) के सहयोग से तैयार की गई, ने अनुमान लगाया है कि वर्तमान 20.6 मिलियन केस 2050 तक 35 मिलियन तक बढ़ेंगे – 66.7% की उल्लेखनीय वृद्धि।

वर्तमान स्थिति और मृत्यु दर

आज कैंसर लगभग 10 मिलियन लोगों की वार्षिक मृत्यु का कारण बन रहा है, यानी हर दिन 26,000 से अधिक जीवन समाप्त हो रहे हैं। यह रोग हृदय‑संबंधी रोगों के बाद विश्व का दूसरा प्रमुख मृत्यु कारण बन चुका है, जिससे सामाजिक और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।

रोकथाम के प्रमुख कारक

रिपोर्ट के अनुसार लगभग चार में से एक कैंसर केस रोकथाम योग्य जोखिम कारकों से जुड़ा है – तंबाकू, शराब, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वस्थ आहार और कुछ संक्रमण (HPV, हेपेटाइटिस बी/सी, हेलिकोबैक्टर पायलोरी)। कई देश ने रोकथाम नीतियों के माध्यम से रोग दर को घटाया है, परन्तु प्रगति अभी भी धीमी है।

असमानता और उपचार में अंतर

उच्च आय वाले देशों में स्तन कैंसर के 5‑वर्ष जीवित रहने की दर 87% है, जबकि न्यून आय वाले देशों में यह केवल 42% तक गिर जाती है। इसके अलावा, केवल 30% देशों ने कैंसर देखभाल को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज में शामिल किया है, जिससे लाखों लोग आवश्यक उपचार से वंचित रह जाते हैं। दवाओं की उपलब्धता भी असमान है; निम्न‑आय वाले देशों में शीर्ष प्राथमिकता वाली दवाओं की उपलब्धता 9‑54% है, जबकि उच्च आय वाले देशों में 68‑94% तक पहुँच है।

एशिया का बोझ

जनसंख्या के आकार के कारण एशिया ने 2024 में विश्व के 50.7% कैंसर केस और 56.5% मौतों का जिम्मेदार बना। फेफड़ों के कैंसर ने वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण बना हुआ है, जबकि पुरुषों में फेफड़ा, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल, और महिलाओं में स्तन, फेफड़ा और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे आम हैं।

स्वास्थ्य से परे असर

WHO की पहली वैश्विक सर्वेक्षण में पाया गया कि 45% रोगियों को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जबकि आधे से अधिक ने मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों की रिपोर्ट दी। देखभाल करने वाले भी सामाजिक अलगाव और बिना वेतन के देखभाल के बोझ से जूझते हैं। यह दर्शाता है कि कैंसर केवल शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है।

आगे का रास्ता

रिपोर्ट ने सरकारों से अपील की है कि वे कैंसर रोकथाम को राजनीतिक प्राथमिकता बनाएं, स्क्रिनिंग और उपचार तक पहुँच को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के माध्यम से विस्तारित करें, स्वास्थ्य कर्मियों में निवेश बढ़ाएं और आवश्यक दवाओं की किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करें। केवल समन्वित वैश्विक कार्रवाई से ही इस बढ़ते बोझ को नियंत्रित किया जा सकता है।