भारत के खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण ने स्विगी के इंस्टामार्ट प्लेटफ़ॉर्म पर कई शिकायतों के बाद नौ नोटिस जारी किए, जबकि कंपनी ने दावा किया कि यह केवल लाइसेंस अपडेट से संबंधित प्रशासनिक मुद्दे थे।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- FSSAI ने स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस भेजे, खाद्य सुरक्षा और लेबलिंग के उल्लंघन पर।
- स्विगी ने बताया कि यह केवल लाइसेंस अपडेट से जुड़ा प्रशासनिक मामला था और कोई वित्तीय दंड नहीं लगा।
- यह कदम FSSAI के व्यापक अनुपालन अभियान का हिस्सा है, जिसमें शराब, लट्टे और अन्य कंपनियों पर भी नोटिस जारी किए गए।
नई दिल्ली: खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्विगी के इंस्टामार्ट प्लेटफ़ॉर्म पर नौ औपचारिक नोटिस जारी किए हैं, जो कई उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग और विज्ञापन मानकों के उल्लंघन के आरोपों पर आधारित हैं। यह कार्रवाई स्विगी के हालिया प्रतिबंध आदेश के एक दिन बाद हुई, जिसमें कंपनी को अपनी फ़ूड ऑर्डरिंग और डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म, टॉइंग, के लाइसेंस विवरण को अपडेट करने के लिए कहा गया था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
स्विगी ने पिछले शुक्रवार एक नियामक फाइलिंग में स्पष्ट किया कि यह मामला किसी भी खाद्य सुरक्षा चिंता से संबंधित नहीं था। कंपनी ने 9 जुलाई, 2026 को एक संशोधित FSSAI लाइसेंस प्राप्त कर लिया था, जिससे यह दावा करती है कि यह प्रशासनिक प्रकृति का था और इसका वित्तीय प्रभाव शून्य है। यह कदम FSSAI के व्यापक नियामक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बढ़ाना है।
अन्य प्रमुख नोटिस
सप्ताह के दौरान, FSSAI ने शराब उद्योग के निर्माताओं को अवैध फ्लेवर उपयोग, भ्रामक आयु दावे और प्रकटीकरण मानकों के उल्लंघन पर नोटिस भेजे। इसी तरह, लोटे इंडिया, फर्न्स एण्ड पिटेल्स और क्यूबेरा फूड्स को भी भ्रामक दावे और लेबलिंग के लिए चेतावनी दी गई। अन्य कंपनियों को “100 प्रतिशत शाकाहारी”, “100 प्रतिशत प्राकृतिक”, “प्रिमियम चॉकलेट”, “ताजा” और “पैसेवाले” जैसे दावों पर भी जांच का सामना करना पड़ा।
उद्योग पर प्रभाव और भविष्य की दिशा
FSSAI का यह सख्त रुख खाद्य उद्योग को अधिक पारदर्शी और नियामक अनुपालन के प्रति सचेत करता है। कंपनियों को अपने उत्पाद लेबल, विज्ञापन और लाइसेंसिंग दस्तावेज़ों को सटीक और समय पर अपडेट करने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, उपभोक्ता शिकायतों और स्वयं-निगरानी (सुओ मोटू) के आधार पर जारी नोटिस यह दर्शाते हैं कि नियामक निकायों का ध्यान बढ़ रहा है।