तमिलनाडु की कुल प्रजनन दर (TFR) अब 1.3 तक गिर गई है, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से काफी कम है। स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने कहा कि जनसंख्या की उम्र बढ़ने की प्रवृत्ति को बदलने के लिए कारणों का विश्लेषण आवश्यक है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु की TFR 1.3, राष्ट्रीय औसत 1.9 से नीचे
  • आबादी का वृद्धावस्था पक्ष बढ़ रहा है, 10 साल में 20% लोग 60 वर्ष से ऊपर होंगे
  • सरकार प्रजनन प्रोत्साहन, स्वास्थ्य सेवाएँ और लैंगिक समानता को नीति के केंद्र में रख रही है

तमिलनाडु में कुल प्रजनन दर (TFR) अब 1.3 पर स्थिर हो गई है, जबकि प्रतिस्थापन स्तर 2.1 माना जाता है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष 1.4 से घटकर आया है, और भारत के समग्र TFR 1.9 से भी कम है। केजी अरुणराज, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इस आंकड़े को राष्ट्रीय जनसांख्यिकीय दृष्टिकोण से अत्यंत चिंताजनक बताया।

जनसंख्या का वृद्धावस्था पक्ष और आर्थिक प्रभाव

मंत्री ने बताया कि तमिलनाडु में वर्तमान में 100 में से 16 लोग 60 वर्ष से अधिक आयु के हैं, और अगले दशक में यह अनुपात 20 में बढ़ जाएगा। यह वृद्धावस्था पक्ष आर्थिक उत्पादकता, स्वास्थ्य देखभाल लागत और सामाजिक सुरक्षा पर भारी दबाव डालता है। आर्थिक कारक, जैसे रोजगार की कमी और महिलाओं की कार्यस्थल पर बढ़ती भागीदारी, इस प्रवृत्ति को तेज कर रहे हैं।

प्रोत्साहनात्मक उपाय और मौजूदा योजनाएँ

तमिलनाडु ने जन्म प्रोत्साहन के लिए विशेष उपाय अपनाए हैं, जैसे एक वर्ष की मातृत्व अवकाश, दो महीने का पितृत्व अवकाश, तथा बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा। अरुणराज ने बताया कि पड़ोसी आंध्र प्रदेश में तीसरे बच्चे के लिए ₹30,000 और चौथे बच्चे के लिए ₹40,000 की वित्तीय प्रोत्साहन योजना लागू है, जबकि तमिलनाडु में इन उपायों को सामाजिक समानता के साथ जोड़ना आवश्यक है।

स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की दिशा

मंत्री ने सभी प्रसवों को स्वास्थ्य संस्थानों में करवाने की अनिवार्यता पर बल दिया और घर पर प्रसव करने वाले मामलों में सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई। साथ ही उन्होंने गर्भावस्था के बीच दो से तीन साल का उचित अंतराल रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिससे माँ और शिशु दोनों की शारीरिक‑मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके।

लिंग समानता और कार्यस्थल में समर्थन

तमिलनाडु में 100 कार्यरत महिलाओं में से 41 महिलाएँ राज्य की हैं, जो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को दर्शाता है। अरुणराज ने कहा, जब महिलाएँ यह मानती हैं कि बच्चों का जन्म उनके करियर को प्रभावित करेगा, तो वे गर्भधारण को टालती हैं। इसलिए परिवार में पुरुषों की जिम्मेदारी को बढ़ाना, बाल देखभाल में सहयोग प्रदान करना, तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है।