पंजाबी गायक-एक्टर सुनंदा शर्मा ने अपने डिप्रेशन के सबसे अंधेरे दौर का खुलासा किया, जहाँ वह 2 महीने 17 दिन अंधेरे कमरे में बंद रही। इस अनुभव ने उनके प्यार, शादी, वित्तीय स्वतंत्रता और रिश्तों के दृष्टिकोण को गहराई से बदल दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- सुनंदा ने 2 महीने 17 दिन अंधेरे कमरे में बिताए
- डिप्रेशन ने उनके रिश्ते और वित्तीय विचारों को बदल दिया
- मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
पंजाबी संगीत जगत की चमकती हुई सितारा सुनंदा शर्मा ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में खुलकर बताया कि उन्होंने डिप्रेशन के कारण खुद को "2 महीने 17 दिन" तक एक अंधेरे कमरे में बंद रखा। यह खुलासा न केवल उनके प्रशंसकों के लिए एक व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि भारतीय मनोरंजन उद्योग में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में चर्चा को भी नई दिशा देता है।
डिप्रेशन का गहन अनुभव
शुभंकर मिश्रा के साथ किए गए साक्षात्कार में सुनंदा ने बताया कि वह अपने कमरे में पूरी तरह अंधेरे में रहने के दौरान लगभग कोई संपर्क नहीं रख पाई। वह अपने परिवार, खासकर अपनी माँ के साथ भी संवाद नहीं कर पाई, जिससे एक "अंधेरी" अवस्था उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा, "अगर मुझे भूख लगती, तो मैं माँ से खाना मांगती, पर माँ के दरवाज़ा खोलते ही अक्सर एक झगड़ा हो जाता था।" इस प्रकार का सामाजिक अलगाव डिप्रेशन के गंभीर लक्षणों को दर्शाता है।
रिश्ते और आत्मविश्वास पर प्रभाव
डिप्रेशन के बाद सुनंदा ने स्वीकार किया कि अभी भी उसका कुछ हिस्सा "भय" और "असुरक्षा" में बसा है। वह कहती हैं कि जब कोई उन्हें प्यार या स्नेह दिखाता है, तो वह आँसुओं से भर जाती हैं और अक्सर खुद को "धन से लोगों को खरीदने" की प्रवृत्ति अपनाती थीं। यह व्यवहार मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जैसे डॉ. रिम्पा सार्कर, द्वारा बताई गई भावनात्मक चोटों से मेल खाता है, जहाँ लोग आत्म-मूल्य की कमी के कारण अत्यधिक भौतिकता की ओर रुख करते हैं।
वित्तीय स्वतंत्रता का संदेश
सुनंदा ने अपने अनुभव को एक सामाजिक संदेश में बदलते हुए सभी महिलाओं को "आर्थिक स्वतंत्रता" पर ज़ोर देने का आग्रह किया। वह बताती हैं कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें एक विषाक्त रिश्ते से बाहर निकलने की शक्ति दी। उनका मानना है कि "पैसा स्वतंत्रता देता है" और यह महिलाओं को अपने करियर और व्यक्तिगत लक्ष्य पर फोकस करने में मदद कर सकता है।
भविष्य की दिशा और आशा
भले ही सुनंदा ने अपने अतीत के दर्द को स्वीकार किया है, वह अभी भी संगीत और अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैं अभी अपने संगीत, काम और वित्त पर फोकस कर रही हूँ, लेकिन आशा है कि समय के साथ मैं फिर से प्यार में खुल सकूँगी।" इस तरह का व्यक्तिगत विकास दर्शाता है कि डिप्रेशन का उपचार केवल चिकित्सा नहीं, बल्कि आत्म-खोज और सामाजिक समर्थन का भी मिश्रण है।