एक नई रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के कई शहरों में तापमान बढ़ने के कारण नींद में उल्लेखनीय कमी देखी गई है। यह कमी स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और आर्थिक उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- दक्षिण भारत में 1970‑1975 से 2025‑2025 तक नींद में 4‑7% की कमी हुई।
- तमिलनाडु में जलवायु‑संबंधित नींद नुकसान 7.9 घंटे/वर्ष सबसे अधिक।
- उच्च तापमान वाले रातों से स्ट्रोक, हृदय‑रोग और मृत्यु जोखिम बढ़ता है।
कलाइमेट सेंट्रल द्वारा प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन ने दर्शाया है कि दक्षिण भारत के 11 प्रमुख शहरों में गर्मी के कारण नींद में गिरावट स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। चेन्नई, कोयंबटूर, इरोड, काल्लाकुरीची, मदुरै, सलीम, थेनी, तिरुचिरापल्ली, तिरुनेलवेली और तिरुप्पुर जैसे शहरों में 1970‑1975 की अवधि की तुलना में 2025‑2025 में नींद की अवधि में 4% से 7% तक की कमी दर्ज की गई है। पुदुचेरी में यह कमी 3% तक पहुँची।