मुंबई और नवी मुंबई में स्लीप एपनिया का संकट गहरा रहा है, जहाँ विशेषज्ञों के अनुसार 80-90% मामलों की पहचान ही नहीं हो पाती। अपोलो हॉस्पिटल्स ने इस 'साइलेंट किलर' से बचने के लिए विशेष क्लिनिक शुरू किया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मुंबई और नवी मुंबई में लगभग 45-50 लाख लोग नींद संबंधी विकारों से जूझ रहे हैं।
- स्लीप एपनिया के 80-90% मामलों का निदान (Diagnosis) नहीं हो पाता है।
- लगातार खर्राटे लेना, दिल के दौरे और स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
- अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने विशेष 'स्लीप डिसऑर्डर क्लिनिक' की शुरुआत की है।
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट धीरे-धीरे पैर पसार रहा है। अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि स्लीप डिसऑर्डर, विशेष रूप से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA), एक 'साइलेंट किलर' के रूप में उभर रहा है। अनुमान है कि मुंबई और नवी मुंबई के लगभग 45 से 50 लाख लोग नींद संबंधी श्वसन संबंधी समस्याओं के साथ जी रहे हैं, लेकिन इनमें से 80-90% लोगों को पता ही नहीं है कि वे इस बीमारी से ग्रस्त हैं।
कार्यजीवन और तनाव का प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या कॉर्पोरेट जगत के कामकाजी पेशेवरों में सबसे अधिक देखी जा रही है। लंबे कामकाजी घंटे, अनियमित जीवनशैली, अत्यधिक तनाव और शारीरिक गतिविधि की कमी ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, मध्यम आयु वर्ग के कामकाजी पुरुषों और महिलाओं में से प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति स्लीप एपनिया के उच्च जोखिम पर है। लोग अक्सर तेज खर्राटों और दिन में अत्यधिक थकान को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो कि एक बड़ी भूल हो सकती है।
स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम
डॉ. जयलक्ष्मी टी. के. (सीनियर कंसल्टेंट - पल्मोनोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स) ने स्पष्ट किया कि खर्राटे लेना कोई मामूली आदत नहीं है। यह शरीर का एक चेतावनी संकेत है कि नींद के दौरान सांस बार-बार रुक रही है, जिससे मस्तिष्क और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह उच्च रक्तचाप (Hypertension), दिल का दौरा, स्ट्रोक, मधुमेह और अचानक कार्डियक अरेस्ट के जोखिम को दो से तीन गुना तक बढ़ा सकता है।
अपोलो की नई पहल: समर्पित स्लीप क्लिनिक
इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट को देखते हुए, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने एक समर्पित 'स्लीप डिसऑर्डर क्लिनिक' लॉन्च किया है। यह क्लिनिक एक बहु-विषयक दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें पल्मोनोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक और स्लीप टेक्नोलॉजिस्ट एक साथ मिलकर काम करते हैं। इसका उद्देश्य सटीक निदान, स्लीप स्टडीज और व्यक्तिगत उपचार योजनाएं प्रदान करना है।
अपोलो हॉस्पिटल्स के क्षेत्रीय सीईओ, अरुणेश पुनेथा ने कहा, "नींद कोई विलासिता नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का एक मुख्य स्तंभ है। जिस तरह लोग अपने रक्तचाप या शुगर की जांच करते हैं, उन्हें अपनी नींद की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए।"