तेलंगाना में ICMR के एक अध्ययन ने साबित कर दिया है कि ड्रोन के जरिए टीबी के नमूनों को भेजने से जांच का समय 15 दिन से घटकर 5 दिन रह गया है और मरीजों का खर्च भी लगभग खत्म हो गया है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ड्रोन तकनीक से टीबी (TB) निदान का समय 15 दिनों से घटकर मात्र 5 दिन रह गया है।
  • मरीजों का औसत जेब से होने वाला खर्च ₹9,451 से घटकर मात्र ₹91 हो गया है।
  • तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले में 'i-DRONE' पहल के तहत यह सफल प्रयोग किया गया।
  • यह तकनीक ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में क्रांतिकारी साबित होगी।

भारत में तपेदिक (TB) के खिलाफ लड़ाई में एक क्रांतिकारी तकनीकी बदलाव देखने को मिला है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक हालिया अध्ययन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ड्रोन तकनीक न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गति बढ़ा सकती है, बल्कि यह गरीब मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी लगभग समाप्त कर सकती है। तेलंगाना के यादाद्री-भुवनगिरी जिले में किए गए इस अध्ययन ने दिखाया कि कैसे 'i-DRONE' पहल ने टीबी निदान की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है।

निदान में गति और लागत में भारी कमी

अध्ययन के अनुसार, पहले टीबी के नमूनों (Sputum samples) की जांच के लिए मरीजों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे निदान में औसतन 15 दिन का समय लगता था। लेकिन ड्रोन के माध्यम से नमूनों को सीधे लैब तक पहुँचाने से यह समय घटकर मात्र 5 दिन रह गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीजों का जेब से होने वाला खर्च (Out-of-pocket expenditure), जो पहले लगभग ₹9,451 था, अब घटकर महज ₹91 रह गया है। कई मामलों में तो यह खर्च शून्य तक पहुँच गया है।

i-DRONE पहल: कैसे काम करता है यह मॉडल?

यह परियोजना AIIMS बिबिनगर और राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के सहयोग से चलाई गई। इस मॉडल के तहत एक 'हब-एंड-स्पोक' नेटवर्क बनाया गया, जिसमें 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHCs), 60 उप-केंद्र और चार टीबी इकाइयाँ शामिल थीं। अब मरीजों को दूर स्थित प्रयोगशालाओं तक जाने की आवश्यकता नहीं है; वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर नमूना दे सकते हैं, जिसे ड्रोन के जरिए तुरंत विशेषज्ञ लैब तक पहुँचा दिया जाता है।

ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए गेम चेंजर

भारत दुनिया में टीबी के सबसे अधिक मामलों वाले देशों में से एक है। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब सड़क संपर्क और मजदूरी का नुकसान मरीजों को जांच कराने से रोकता है। ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बाहल के अनुसार, ड्रोन जैसी तकनीकें भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और दूरदराज के इलाकों में किफायती एवं समय पर निदान सुनिश्चित करने में मदद करेंगी। यह अध्ययन न केवल टीबी बल्कि भविष्य में वैक्सीन और दवाओं के वितरण के लिए भी एक नया मार्ग प्रशस्त करता है।