एक नए अध्ययन के अनुसार, भारत में मधुमेह (डायबिटीज), सुनने की क्षमता में कमी और शारीरिक निष्क्रियता डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारक हैं। विशेष रूप से महिलाओं और ग्रामीण आबादी में इसका खतरा अधिक देखा गया है।

मुख्य बातें

  • मधुमेह और सुनने की क्षमता में कमी भारत में डिमेंशिया के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं।
  • महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में डिमेंशिया का प्रसार अधिक पाया गया है।
  • शारीरिक निष्क्रियता और कुपोषण भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करके डिमेंशिया के मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हाल ही में रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में डिमेंशिया (स्मृति लोप) के बढ़ते मामलों के पीछे कई महत्वपूर्ण और परिवर्तनीय कारक हैं। 25 वर्षों के डेटा का विश्लेषण करने के बाद, शोधकर्ताओं ने पाया कि मधुमेह (Diabetes), सुनने की शक्ति का कम होना और शारीरिक गतिविधि की कमी भारत में मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं।

अध्ययन के अनुसार, भारत में डिमेंशिया का प्रसार महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसके मामले अधिक देखे गए हैं, जिसका मुख्य कारण इन जोखिम कारकों का समय पर निदान (underdiagnosis) न हो पाना माना जा रहा है। शोध में यह भी स्पष्ट किया गया है कि दक्षिण एशियाई लोगों में मधुमेह अक्सर कम उम्र में ही विकसित हो जाता है, जो डिमेंशिया के जोखिम को दोगुना या तिगुना कर सकता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का स्वरूप पश्चिमी देशों से काफी अलग है। जहाँ पश्चिमी देशों में मोटापा डिमेंशिया का मुख्य कारण है, वहीं भारत में कुपोषण (Undernourishment) और कम वजन भी डिमेंशिया के बढ़ते जोखिम से जुड़े हैं। यह दर्शाता है कि भारत में स्वास्थ्य नीतियों को केवल जीवनशैली की बीमारियों पर ही नहीं, बल्कि पोषण संबंधी सुधारों पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

मधुमेह और सुनने की क्षमता में कमी जैसे कारकों को नियंत्रित करके डिमेंशिया के लगभग आधे मामलों को रोका या टाला जा सकता है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि भारत में 41% वयस्क सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं, जो डिमेंशिया के जोखिम को 59% तक बढ़ा देता है। इसके अतिरिक्त, सीमित शिक्षा और दृष्टि दोष भी महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। भारत में सीमित शिक्षा डिमेंशिया के 22% परिवर्तनीय जोखिमों के लिए जिम्मेदार है, जो वैश्विक औसत (8%) से काफी अधिक है।

क्या आप जानते हैं?: सप्ताह में मात्र 35 मिनट की शारीरिक गतिविधि डिमेंशिया के जोखिम को 41% तक कम कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. भारत में डिमेंशिया के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक क्या है?
मधुमेह, सुनने की क्षमता में कमी और शारीरिक निष्क्रियता भारत में डिमेंशिया के प्रमुख जोखिम कारक हैं।

2. क्या डिमेंशिया को रोका जा सकता है?
हाँ, जीवनशैली में बदलाव जैसे नियमित व्यायाम, मधुमेह का नियंत्रण और सुनने की समस्याओं का उपचार करके इसके जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।