नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) ने स्पष्ट किया है कि पंजीकृत आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा डॉक्टरों को 'झोलाछाप' या 'फर्जी डॉक्टर' नहीं कहा जा सकता। यह आदेश चिकित्सकों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न और मानहानि को रोकने के लिए जारी किया गया है।
मुख्य बातें
- NCISM ने स्पष्ट किया कि पंजीकृत आयुष चिकित्सक कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त डॉक्टर हैं।
- आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा के डिग्री धारकों को 'झोलाछाप' कहना गलत है।
- यह निर्णय चिकित्सकों के खिलाफ सोशल मीडिया और मीडिया में हो रहे उत्पीड़न को रोकने के लिए लिया गया है।
- यह आदेश आयुष डॉक्टरों को एलोपैथिक डॉक्टरों के बराबर नहीं बनाता, बल्कि उनकी कानूनी स्थिति की रक्षा करता है।
नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (NCISM) ने एक महत्वपूर्ण सर्कुलर जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की मान्यता प्राप्त पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के योग्य और पंजीकृत चिकित्सक केवल इसलिए 'झोलाछाप' (Quacks) या 'फर्जी डॉक्टर' नहीं कहला सकते क्योंकि वे भारतीय चिकित्सा पद्धति का अभ्यास करते हैं।
उत्पीड़न के खिलाफ सुरक्षा कवच
NCISM के अनुसार, यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है जिनमें पंजीकृत आयुष चिकित्सकों को सार्वजनिक नोटिस, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से निशाना बनाया जा रहा था। कई मामलों में इन चिकित्सकों को 'झोलाछाप' कहकर अपमानित किया गया और उनके खिलाफ मानहानिपूर्ण अभियान चलाए गए।
क्या यह एलोपैथी के बराबर है?
यहाँ एक महत्वपूर्ण अंतर समझना आवश्यक है। BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह आदेश आयुष डॉक्टरों को एलोपैथी (MBBS) डॉक्टरों के समकक्ष नहीं बनाता है। यह केवल यह सुनिश्चित करता है कि उनके पास जो वैध डिग्री (जैसे BAMS, BUMS, BSMS, BSRMS) है, उसके आधार पर उन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है।
पंजीकृत आयुष चिकित्सक अपनी प्रणाली के भीतर पूर्णतः कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पेशेवर हैं।
कानूनी स्थिति और अधिकार
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि क्या कोई आयुष डॉक्टर एलोपैथिक दवाएं लिख सकता है, यह संबंधित राज्य के कानूनों, विशिष्ट वैधानिक प्रावधानों और अदालती फैसलों पर निर्भर करेगा। यह आदेश केवल उनकी पेशेवर पहचान की रक्षा करता है और उन्हें 'झोलाछाप' जैसे अपमानजनक लेबल से बचाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
NCISM को National Commission for Indian System of Medicine Act, 2020 के तहत स्थापित किया गया था। इसने पुराने 'सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन' (CCIM) का स्थान लिया है। इसका मुख्य कार्य चिकित्सा शिक्षा के मानकों को बनाए रखना और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का नियमन करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या इस आदेश के बाद आयुर्वेद डॉक्टर एलोपैथिक दवाएं दे सकते हैं?
नहीं, यह आदेश केवल उनकी पहचान की रक्षा करता है। दवा लिखने का अधिकार राज्य के विशिष्ट नियमों पर निर्भर करता है।
2. NCISM का मुख्य कार्य क्या है?
यह आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा प्रणालियों में चिकित्सा शिक्षा और पेशेवर मानकों का नियमन करता है।