अहमदाबाद के ज़ायडस अस्पताल ने गुजरात में बर्न मैनेजमेंट (जलन प्रबंधन) में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। जटिल मामलों में 90% से अधिक जीवित रहने की दर के साथ, अस्पताल का प्लास्टिक सर्जरी विभाग जीवन बचाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

मुख्य बातें

  • ज़ायडस अस्पताल ने 50% से अधिक शरीर जलने वाले मरीजों में 90% से अधिक सफलता दर हासिल की है।
  • डॉ. गिरीश आमलानी के नेतृत्व में उन्नत स्किन ग्राफ्टिंग तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
  • अस्पताल में विशेष बर्न आईसीयू (Burn ICU) और क्रिटिकल केयर टीम उपलब्ध है।
  • बच्चों और वयस्कों के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ उपचार प्रोटोकॉल लागू हैं।

भारत में हर साल लाखों लोग जलने की चोटों से जूझते हैं, जो एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। गुजरात के अहमदाबाद में स्थित ज़ायडस अस्पताल (Zydus Hospital) ने इस संकट से निपटने के लिए एक अत्याधुनिक बर्न मैनेजमेंट सिस्टम विकसित किया है। डॉ. गिरीश आमलानी के नेतृत्व में, अस्पताल का बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग न केवल मामूली चोटों का इलाज कर रहा है, बल्कि शरीर के 50% से अधिक हिस्से में जले गंभीर मरीजों को नया जीवन दे रहा है।

तकनीकी उत्कृष्टता और उपचार प्रक्रिया

बर्न मैनेजमेंट में सफलता केवल दवाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन्नत सर्जिकल तकनीकों की आवश्यकता होती है। ज़ायडस अस्पताल में, डॉ. गिरीश आमलानी इलेक्ट्रिक डर्मेटोम (Electric Dermatome) जैसे उपकरणों का उपयोग करते हैं, जो त्वचा की पतली और समान परतें निकालने में मदद करते हैं। इसके बाद, 'मेशिंग डिवाइस' के माध्यम से इन ग्राफ्ट्स को फैलाया जाता है, जिससे कम त्वचा से बड़े घावों को कवर किया जा सकता है।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, बर्न मैनेजमेंट में सफलता दर सीधे तौर पर संक्रमण नियंत्रण और तरल पदार्थ (fluid) के संतुलन पर निर्भर करती है। ज़ायडस अस्पताल में डॉ. प्रतिभा दिलीप और डॉ. चिन्तन ढेबर की क्रिटिकल केयर टीम यह सुनिश्चित करती है कि मरीजों में 'बर्न शॉक' या सेप्सिस जैसी घातक स्थितियां उत्पन्न न हों।

जटिल बर्न मामलों में शुरुआती 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, जहाँ एयरवे मैनेजमेंट और फ्लूइड बैलेंस ही जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करते हैं।

अस्पताल ने हाल ही में एक 40 वर्षीय पुलिस अधिकारी का सफल उपचार किया, जिनके शरीर का 65% हिस्सा जल गया था। दो महीने के गहन उपचार और स्किन ग्राफ्टिंग के बाद, मरीज अब स्वस्थ है। यह सफलता अस्पताल के उन्नत आइसोलेशन सेटअप और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का परिणाम है।

क्या आप जानते हैं?: जब शरीर का 30% से अधिक हिस्सा जल जाता है, तो मरीज को 'बर्न शॉक' का खतरा होता है, जिससे अंगों के विफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. बर्न मैनेजमेंट में 'स्किन ग्राफ्टिंग' क्या है?
यह एक प्रक्रिया है जिसमें शरीर के स्वस्थ हिस्से से त्वचा निकालकर जले हुए हिस्से पर लगाई जाती है ताकि घाव भर सके।

2. बच्चों में बर्न कितना गंभीर माना जाता है?
बच्चों में यदि 10% से अधिक शरीर का हिस्सा जल जाए, तो इसे गंभीर माना जाता है और विशेषज्ञ केंद्र की आवश्यकता होती है।