भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में प्रस्ताव दिया है कि खाद्य पैकेटों पर चेतावनी प्रतीकों के बजाय पोषक तत्वों की दैनिक सीमा दिखाई जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसे उपभोक्ता हितों के खिलाफ और भ्रामक बताया है।

मुख्य बातें

  • FSSAI अब चेतावनी प्रतीकों (Warning Symbols) के बजाय पोषक तत्वों की दैनिक सीमा दिखाने का समर्थन कर रहा है।
  • विशेषज्ञों का तर्क है कि इससे उपभोक्ता यह नहीं समझ पाएंगे कि उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है या नहीं।
  • ICMR-NIN के अनुसार, भारत में 57% बीमारियों का कारण खराब खान-पान है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पैकेज्ड फूड लेबलिंग को लेकर एक नया रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे में, नियामक ने सुझाव दिया है कि पैकेट पर केवल पोषक तत्वों की मात्रा और सर्विंग साइज देने के बजाय, सरकार द्वारा निर्धारित चीनी, सैचुरेटेड फैट और नमक की दैनिक अनुशंसित सीमा भी दिखाई जाए।

यह प्रस्ताव उन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के दावों के विपरीत है जो मांग कर रहे थे कि पैकेट के सामने वाले हिस्से पर स्पष्ट 'चेतावनी संकेत' (Warning Labels) होने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साधारण उपभोक्ता सुपरमार्केट की लाइन में खड़े होकर जटिल गणनाएं नहीं कर सकता कि कोई उत्पाद उसके स्वास्थ्य के लिए कितना जोखिम भरा है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि FSSAI का यह कदम खाद्य उद्योग के दबाव और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। जहाँ चेतावनी लेबल सीधे तौर पर उत्पाद को 'अस्वास्थ्यकर' घोषित करते हैं, वहीं दैनिक सीमा का प्रदर्शन जिम्मेदारी उपभोक्ता पर डाल देता है। यह 'सूचना' और 'चेतावनी' के बीच का एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण अंतर है।

"यह अनुपालन नहीं, बल्कि अवज्ञा है; उपभोक्ताओं को सरल चेतावनी की आवश्यकता है, न कि गणितीय डेटा की।" - डॉ. अरुण गुप्ता, NAPi।

इससे पहले, FSSAI ने 'इंडियन न्यूट्रिशन रेटिंग' (INR) का प्रस्ताव दिया था, जिसमें स्टार रेटिंग (0.5 से 5 स्टार) के माध्यम से स्वास्थ्य स्कोर दिया जाना था। हालांकि, इस पर भी विवाद हुआ क्योंकि आलोचकों का मानना था कि एक पोषक तत्व की कमी को दूसरे पोषक तत्व के सकारात्मक अंक से छिपाया जा सकता है।

विशेषता चेतावनी लेबल (Warning Label) दैनिक सीमा (Daily Limit/Nutrient Info)
उद्देश्य जोखिम को तुरंत पहचानना पोषक तत्वों की जानकारी देना
उपभोक्ता प्रयास न्यूनतम (एक नज़र में स्पष्ट) अधिक (तुलना और गणना आवश्यक)
प्रभाव खरीद निर्णय को तेजी से प्रभावित करता है केवल सूचित करता है

भारत में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) के बढ़ते सेवन के कारण बच्चों और किशोरों में मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या FSSAI का यह नया प्रस्ताव वास्तव में जनस्वास्थ्य की रक्षा करता है या केवल कंपनियों को राहत देता है।

क्या आप जानते हैं?: ICMR-NIN के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) का लगभग 57% बोझ सीधे तौर पर खराब आहार विकल्पों से जुड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: FSSAI का नया प्रस्ताव क्या है?
उत्तर: FSSAI चाहता है कि पैकेट पर चीनी, नमक और फैट की मात्रा के साथ-साथ उनकी दैनिक अनुशंसित सीमा भी लिखी हो, ताकि ग्राहक खुद तुलना कर सकें।

प्रश्न 2: स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
उत्तर: क्योंकि उनका मानना है कि सामान्य ग्राहक डेटा का विश्लेषण नहीं कर पाएगा और उसे केवल एक स्पष्ट 'चेतावनी चिन्ह' की जरूरत है।