कर्नाटक सरकार ने 'इंटीग्रेटेड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम' (IPGRS) लॉन्च किया है, जिससे नागरिक अब क्यूआर कोड स्कैन करके अस्वास्थ्यकर भोजन और एक्सपायर्ड दवाओं की शिकायत कर सकेंगे।
- कर्नाटक ने खाद्य और औषधि सुरक्षा के लिए भारत का पहला QR-आधारित IPGRS सिस्टम लॉन्च किया है।
- नागरिक अब रेस्टोरेंट और मेडिकल स्टोर पर लगे कोड को स्कैन कर मिलावट या गंदगी की रिपोर्ट कर सकते हैं।
- सरकार 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को स्वयंसेवक के रूप में जोड़ने की योजना बना रही है।
जनस्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए, कर्नाटक सरकार ने इंटीग्रेटेड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम (IPGRS) की शुरुआत की है। स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर द्वारा बेंगलुरु में लॉन्च किए गए इस डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य खाद्य मिलावट और दवाओं की अनियमितताओं पर लगाम लगाना है। अब सभी भोजनालयों और दवा दुकानों पर QR कोड लगाना अनिवार्य होगा, जिसे स्कैन करके आम जनता एक्सपायर्ड दवाओं, अधिक कीमतों या अस्वास्थ्यकर भोजन की शिकायत दर्ज करा सकती है।
यह प्रणाली सरकार के ई-गवर्नेंस केंद्र से जुड़ी है, जिससे शिकायतों की ट्रैकिंग और समाधान आसान हो जाएगा। मंत्री खादर ने बताया कि भारत में यह अपनी तरह की पहली पहल है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (FSDA) राज्य भर में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर रहा है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, मैन्युअल रिपोर्टिंग से QR-आधारित सिस्टम पर जाना सार्वजनिक भागीदारी की बाधाओं को खत्म करता है। निगरानी का विकेंद्रीकरण करके, सरकार प्रभावी रूप से खाद्य और औषधि उद्योग का 'नागरिक-आधारित ऑडिट' कर रही है। इससे न केवल बेईमान विक्रेताओं में डर पैदा होगा, बल्कि सड़क किनारे की दुकानों से लेकर लग्जरी होटलों तक स्वच्छता के मानकों में सुधार होगा।
"कर्नाटक जैसे तेजी से शहरीकरण वाले राज्य में खाद्य सुरक्षा की निगरानी को बड़े पैमाने पर ले जाने का एकमात्र तरीका सार्वजनिक शिकायतों का डिजिटल एकीकरण है।"
इस प्रणाली की आवश्यकता हालिया छापेमारी से स्पष्ट होती है। बेंगलुरु के 60 से अधिक तीन-सितारा और पांच-सितारा होटलों के निरीक्षण में चौंकाने वाले खुलासे हुए। अधिकारियों ने 429 किलोग्राम खराब मटन और चिकन, 203 किलोग्राम मछली और 76 किलोग्राम सड़ी-गली सब्जियां जब्त कीं। साथ ही, कई जगहों पर शाकाहारी भोजन को मांसाहारी भोजन के साथ रखा गया पाया गया, जो सुरक्षा नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
निरीक्षण केवल होटलों तक सीमित नहीं था। FSDA ने 629 पिछड़ा वर्ग छात्रावासों और 331 समाज कल्याण छात्रावासों से 2,400 से अधिक नमूने एकत्र किए। इसके अलावा, राजमार्गों पर स्थित 99 ढाबों पर विभिन्न नियमों के उल्लंघन के लिए कुल 3.67 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। विशेष रूप से शावरमा और कबाब के नमूनों में कृत्रिम रंगों का उपयोग पाया गया, जिस पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
निगरानी तंत्र को और मजबूत करने के लिए, सरकार 60 वर्ष से अधिक आयु के अनुभवी लोगों और स्वयंसेवकों को इस अभियान में शामिल करने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव और सामाजिक जिम्मेदारी का लाभ उठाकर स्थानीय स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
| क्षेत्र | निरीक्षण/कार्रवाई | मुख्य निष्कर्ष/जुर्माना |
|---|---|---|
| लग्जरी होटल | 60+ होटल | 429 किग्रा खराब मांस, 76 किग्रा सड़ी सब्जियां |
| हाईवे ढाबे | 99 प्रतिष्ठान | ₹3.67 लाख का जुर्माना |
| ई-कॉमर्स वेयरहाउस | 236 वेयरहाउस | 44 पर कार्रवाई; ₹1.97 लाख जुर्माना |
| छात्रावास | 960+ छात्रावास | 2,400+ नमूने एकत्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: शिकायत के लिए QR कोड कहाँ मिलेंगे?
कर्नाटक के सभी भोजनालयों, रेस्टोरेंट और दवा दुकानों पर इन QR कोड्स को प्रमुखता से प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
प्रश्न 2: IPGRS के माध्यम से किन समस्याओं की रिपोर्ट की जा सकती है?
उपयोगकर्ता अस्वास्थ्यकर भोजन, कृत्रिम रंगों के उपयोग, एक्सपायर्ड या महंगी दवाओं और दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्ट कर सकते हैं।