एक नए शोध के अनुसार, यदि उच्च उत्सर्जन जारी रहा, तो सदी के अंत तक हर गर्म दिन में अत्यधिक गर्मी के 4 अतिरिक्त घंटे बढ़ सकते हैं। यह अध्ययन चेतावनी देता है कि निम्न और मध्यम आय वाले देश इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

मुख्य बिंदु

  • उच्च उत्सर्जन परिदृश्य में 2100 तक हर गर्म दिन में 4 घंटे अतिरिक्त भीषण गर्मी बढ़ेगी।
  • दैनिक औसत तापमान के बजाय प्रति घंटा विश्लेषण गर्मी के वास्तविक जोखिम को बेहतर ढंग से दर्शाता है।
  • निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

हाल ही में Nature Climate Change जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन ने वैश्विक तापमान वृद्धि के खतरनाक पहलुओं को उजागर किया है। चीन के सन यात-सेन विश्वविद्यालय और दक्षिणी समुद्री विज्ञान एवं इंजीनियरिंग ग्वांगडोंग प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल दैनिक औसत तापमान को मापना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि यह उन छोटे लेकिन घातक समय अंतरालों को अनदेखा कर देता है जब गर्मी अपने चरम पर होती है।

अध्ययन के अनुसार, 1981 से 2023 के बीच वैश्विक भूमि क्षेत्रों में गर्मी की घटनाओं में लगातार वृद्धि देखी गई है। विश्लेषण से पता चला है कि दुनिया के 80% से अधिक भूमि क्षेत्रों में गर्मी बढ़ी है, जिसमें प्रति दशक औसतन 62 अतिरिक्त घंटे भीषण गर्मी दर्ज की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 28% घटनाएं उन दिनों में हुईं जिन्हें पारंपरिक दैनिक मेट्रिक्स ने 'अत्यधिक गर्म' नहीं माना था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह शोध सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना और हीट-वेव चेतावनी प्रणालियों के लिए एक गेम-चेंजर है। जब हम केवल दैनिक अधिकतम तापमान को देखते हैं, तो हम उन 'फ्लैश हीट' घटनाओं को मिस कर देते हैं जो कुछ घंटों के लिए जानलेवा हो सकती हैं। प्रति घंटा डेटा का उपयोग करके सरकारें अधिक सटीक चेतावनी जारी कर सकती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार कर सकती हैं।

"प्रति घंटा गर्मी की चरम सीमाएं दुनिया भर में उभर रही हैं और विभिन्न क्षेत्रों और पीढ़ियों के बीच असमान जोखिम पैदा कर रही हैं।"

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि सदी के अंत तक, प्रति घंटा गर्मी की चरम घटनाओं में चार गुना वृद्धि हो सकती है, जिससे प्रभावित होने वाली जनसंख्या में छह गुना वृद्धि होने की संभावना है। विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देश, जिनके पास अनुकूलन संसाधनों की कमी है, वर्तमान और भविष्य के कुल हीट एक्सपोज़र के तीन-चौथाई हिस्से का सामना करेंगे।

मेट्रिक पारंपरिक दैनिक माप नया प्रति घंटा विश्लेषण
दृष्टिकोण औसत/अधिकतम तापमान घंटे-दर-घंटे चरम सीमा
सटीकता कम (छोटे अंतराल छूट जाते हैं) उच्च (फ्लैश हीट कैप्चर करता है)
जोखिम आकलन सामान्य चेतावनी सटीक सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना
क्या आप जानते हैं?: 'फ्लैश हीट' या हीट बर्स्ट ऐसी घटनाएं हैं जहां तापमान बहुत कम समय में तेजी से बढ़ता है, जो शरीर के लिए अचानक और घातक हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यह अध्ययन दैनिक तापमान माप से अलग क्यों है?
उत्तर: दैनिक माप औसत निकालते हैं, जिससे कुछ घंटों की अत्यधिक गर्मी छिप जाती है। प्रति घंटा माप उन विशिष्ट समयों को पकड़ता है जब तापमान सबसे अधिक खतरनाक होता है।

प्रश्न 2: सबसे अधिक प्रभावित कौन होगा?
उत्तर: निम्न और मध्यम आय वाले देश सबसे अधिक प्रभावित होंगे क्योंकि उनके पास गर्मी से बचने के लिए बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी है।