अहमदाबाद का ज़ायडस अस्पताल उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्थाओं और जटिल स्त्री रोग संबंधी मामलों के प्रबंधन में एक अग्रणी केंद्र बनकर उभरा है। उन्नत बुनियादी ढांचे और विशेषज्ञ टीम के साथ, यह अस्पताल मातृ मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

  • भारत में लगभग 50% गर्भधारण अब 'उच्च-जोखिम' (High-Risk) श्रेणी में आते हैं।
  • ज़ायडस अस्पताल में इन-हाउस ब्लड बैंक, गाइनेक ICU और NICU जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
  • प्लेसेंटा एक्रेटा स्पेक्ट्रम (PAS) जैसे दुर्लभ और जीवन-घातक मामलों का सफल प्रबंधन।
  • IVF और भ्रूण चिकित्सा (Fetal Medicine) में उच्च सफलता दर और जटिलताओं का सटीक समाधान।

भारत ने हाल के वर्षों में मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। ICMR के एक राष्ट्रव्यापी विश्लेषण के अनुसार, भारत में लगभग आधी गर्भधारण अब उच्च-जोखिम वाली श्रेणी में आती हैं। वर्तमान में मातृ मृत्यु दर 1 लाख जीवित जन्मों पर लगभग 88 है, जिसे 2030 तक घटाकर 70 करने का लक्ष्य रखा गया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, अहमदाबाद स्थित ज़ायडस अस्पताल (Zydus Hospitals) का स्त्री रोग और प्रसूति विभाग पश्चिमी भारत में एक भरोसेमंद केंद्र के रूप में उभरा है।

उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्था तब मानी जाती है जब माँ या बच्चे को सामान्य से अधिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। इसके मुख्य कारणों में माँ की अधिक या बहुत कम उम्र, पिछला सिजेरियन डिलीवरी, मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तचाप (Hypertension) शामिल हैं। ज़ायडस अस्पताल इन जटिलताओं को संभालने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाता है, जहाँ प्रसूति, भ्रूण चिकित्सा, एनेस्थीसिया और नियोनेटोलॉजी के विशेषज्ञ 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में प्रति वर्ष लगभग 3 करोड़ गर्भधारण होते हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक है। ऐसे में, उच्च-जोखिम वाले मामलों का एक छोटा प्रतिशत भी लाखों महिलाओं के जीवन को खतरे में डाल सकता है। ज़ायडस अस्पताल जैसे संस्थानों द्वारा अपनाई गई 'मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच' न केवल जीवन बचाती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करती है।

हाल ही में, अस्पताल ने एक 30 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया जिसे प्लेसेंटा एक्रेटा स्पेक्ट्रम (PAS) और प्लेसेंटा प्रीविया जैसी दुर्लभ स्थिति थी। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार में गहराई तक धंस जाता है, जिससे प्रसव के दौरान भारी रक्तस्राव का खतरा रहता है। डॉ. नामिता शाह के नेतृत्व में टीम ने एमआरआई के माध्यम से सटीक मैपिंग की और समय रहते हस्तक्षेप किया।

"PAS जैसे मामलों में, एक इन-हाउस ब्लड बैंक और नियोनेटोलॉजिस्ट की उपस्थिति जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर पैदा कर सकती है, क्योंकि प्रसव के दौरान भारी रक्त हानि से हेमरेजिक शॉक का खतरा होता है।"

सर्जरी के दौरान, प्लेसेंटा मूत्राशय (bladder) की दीवार तक फैल गया था, जिसके लिए यूरोलॉजिस्ट डॉ. कौस्तुभ पटेल की मदद ली गई। टीम ने सफलतापूर्वक बच्चे को जन्म दिया और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए ऑब्सटेट्रिक हिस्टेरेक्टॉमी की। मरीज को 2.5 लीटर रक्त और फ्रोजन प्लाज्मा चढ़ाया गया, जिसके बाद माँ और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए।

इसके अलावा, अस्पताल ने IVF के क्षेत्र में भी अपनी विशेषज्ञता साबित की है। डॉ. रमन पटेल और डॉ. रीतु पटेल ने एक ऐसे जोड़े की मदद की जो 10 वर्षों से संतान प्राप्ति की कोशिश कर रहे थे। जटिलताओं के बावजूद, भ्रूण चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में सफल उपचार सुनिश्चित किया गया, जो अस्पताल की व्यापक देखभाल क्षमता को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं? भारत दुनिया में सबसे अधिक वार्षिक जन्मों वाला देश है, जिससे यहाँ मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की मांग और जटिलता दोनों ही वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: उच्च-जोखिम वाली गर्भावस्था के मुख्य लक्षण या कारण क्या हैं?
उत्तर: मुख्य कारणों में अधिक उम्र, मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पिछली सिजेरियन डिलीवरी शामिल हैं।

प्रश्न 2: प्लेसेंटा एक्रेटा स्पेक्ट्रम (PAS) क्यों खतरनाक है?
उत्तर: इसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार से गहराई से जुड़ जाता है, जिससे प्रसव के दौरान जानलेवा रक्तस्राव (Hemorrhage) हो सकता है।