चेन्नई के कॉवेरी अस्पताल ने मिर्गी के रोगियों के लिए एक एकीकृत क्षेत्रीय मिर्गी केंद्र (K-REC) शुरू किया है, जो मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम के माध्यम से उन्नत देखभाल प्रदान करेगा।

  • कॉवेरी अस्पताल ने चेन्नई के तीनों केंद्रों में एकीकृत क्षेत्रीय मिर्गी केंद्र (K-REC) स्थापित किया।
  • मिर्गी के मामलों में 20%-30% मरीजों पर दवाओं का असर कम होता है।
  • एक विशेषज्ञ टीम (न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन, मनोवैज्ञानिक) जटिल मामलों का समाधान करेगी।
  • उद्देश्य मिर्गी के लिए आवश्यक सर्जरी और वास्तविक सर्जरी के बीच के अंतर को कम करना है।

चेन्नई: स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कॉवेरी अस्पताल ने बुधवार को अपने एकीकृत क्षेत्रीय मिर्गी केंद्र (K-REC) के शुभारंभ की घोषणा की। यह पहल अस्पताल के चेन्नई स्थित तीनों शाखाओं में मिर्गी की देखभाल के लिए एक समन्वित नेटवर्क बनाने के उद्देश्य से की गई है।

न्यूरोसाइंसेज के ग्रुप मेंटर और कॉवेरी अस्पताल के इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन एंड स्पाइन के निदेशक, कृष्ण श्रीधर ने बताया कि भारत की लगभग 1% जनसंख्या मिर्गी से प्रभावित है। उन्होंने एक चिंताजनक तथ्य साझा किया कि लगभग 20% से 30% रोगियों में दवाएं मिर्गी के दौरों को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नहीं होती हैं।

विशेषज्ञों की बहुआयामी टीम

K-REC के तहत, अस्पताल के तीनों केंद्रों पर न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में विशेष केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों को एक बहुआयामी टीम का समर्थन प्राप्त होगा, जिसमें न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोरेडियोलॉजिस्ट, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक, पुनर्वास विशेषज्ञ और न्यूरोसर्जन शामिल होंगे। ये टीमें हर पखवाड़े (fortnight) में एक साथ मिलेंगी ताकि जटिल मामलों का विस्तृत विश्लेषण किया जा सके।

दवाओं से नियंत्रित न होने वाले दौरों को सर्जरी और गहन मूल्यांकन के लिए रेडियल रोड स्थित मुख्य केंद्र पर भेजा जाएगा।

कॉवेरी अस्पताल के सह-संस्थापक और कार्यकारी निदेशक, अरविंदन सेलवराज ने इस अवधारणा की तुलना ऑन्कोलॉजिस्ट द्वारा कैंसर के मामलों के लिए आयोजित की जाने वाली 'ट्यूमर बोर्ड' बैठकों से की। उन्होंने भारत में मिर्गी से जुड़े सामाजिक कलंक (stigma) पर चिंता व्यक्त करते हुए जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में मिर्गी के उपचार में एक बड़ा अंतराल है। अधिकांश मरीज केवल दवाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि कई मामलों में सर्जिकल हस्तक्षेप जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है। K-REC का मॉडल इस अंतराल को भरने के लिए एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है।

वरिष्ठ परामर्शदाता न्यूरोलॉजिस्ट शुभा सुब्रमण्यम ने कहा कि इस पहल का लक्ष्य बच्चों और वयस्कों दोनों में मिर्गी के चिकित्सा और सर्जिकल उपचार का आकलन करना है। वहीं, अरुल मोझी टी. ने भी इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल का समर्थन किया।

Did You Know?: मिर्गी कोई मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि मस्तिष्क में विद्युत गतिविधि के अचानक व्यवधान के कारण होने वाली एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।

Frequently Asked Questions

1. K-REC क्या है?
यह कॉवेरी अस्पताल द्वारा शुरू किया गया एक एकीकृत केंद्र है जो मिर्गी के निदान और उपचार के लिए विभिन्न विशेषज्ञों की एक टीम प्रदान करता है।

2. मिर्गी के लिए सर्जरी कब आवश्यक होती है?
जब दवाएं दौरों को नियंत्रित करने में विफल रहती हैं, तो विशेषज्ञ टीम प्रोटोकॉल के आधार पर सर्जरी की आवश्यकता का निर्णय लेती है।