महाराष्ट्र सरकार का नया क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट बिल अस्पतालों में पारदर्शिता लाने का दावा करता है, लेकिन विशेषज्ञों ने इसमें कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों की कमी की ओर इशारा किया है। यह बिल आपातकालीन देखभाल और पंजीकरण के नियमों में बड़े बदलाव ला सकता है।
- नया बिल अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक केंद्रों पर लागू होगा।
- आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बिना अग्रिम भुगतान के तत्काल उपचार मिलना अनिवार्य होगा।
- अस्पतालों को मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में दरों का प्रदर्शन करना होगा, लेकिन कीमतों पर नियंत्रण नहीं होगा।
- स्वास्थ्य अधिकार समूहों ने शिकायत निवारण तंत्र की कमी पर चिंता जताई है।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 'महाराष्ट्र क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट (पंजीकरण और विनियमन) विधेयक, 2026' पेश किया है। यह विधेयक 77 साल पुराने नर्सिंग होम पंजीकरण अधिनियम की जगह लेगा। इस नए कानून का लक्ष्य अस्पतालों, नर्सिंग होम, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं और डायग्नोस्टिक केंद्रों के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित करना और पंजीकरण को अनिवार्य बनाना है।
विधेयक के तहत, सभी चिकित्सा प्रणालियों जैसे एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, सिद्ध और यूनानी के संस्थानों को कवर किया जाएगा। इसमें एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी सेवाओं को भी शामिल किया गया है। एक नया 'महाराष्ट्र राज्य क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट काउंसिल' बनाया जाएगा जो इन संस्थानों के लिए बुनियादी ढांचे और सेवाओं के मानक तय करेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बिल स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही के बीच एक महीन रेखा खींचता है। जहाँ एक ओर यह पंजीकरण को सख्त बनाता है, वहीं दूसरी ओर यह निजी अस्पतालों को शुल्क निर्धारित करने की पूरी छूट देता है, जिससे मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
नया विधेयक पारदर्शिता तो लाता है, लेकिन कीमतों पर नियंत्रण की कमी इसे मरीजों के लिए जोखिम भरा बना सकती है।
विधेयक में 'गोल्डन आवर' प्रोटोकॉल और आपातकालीन मामलों में बिना जमा राशि (No-Deposit) के उपचार का प्रावधान है। अस्पतालों को मरीज को स्थिर करना होगा और रेफर करने से पहले जीवन रक्षक सहायता प्रदान करनी होगी। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकार समूहों जैसे जन आरोग्य अभियान (JAA) ने चेतावनी दी है कि यह बिल 2021 के नियमों में मौजूद कई महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को हटा देता है।
विशेष रूप से, JAA ने चिंता जताई है कि नए बिल में बकाया बिल के कारण मरीज को बंधक बनाने या मृत शरीर को रोकने के खिलाफ सख्त सुरक्षा उपायों का अभाव है। इसके अलावा, मरीजों के पास अपनी पसंद के डॉक्टर या लैब से जांच कराने का अधिकार भी कमजोर होता दिख रहा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या नया बिल अस्पताल के खर्चों को कम करेगा?
नहीं, यह बिल केवल पारदर्शिता पर केंद्रित है। अस्पताल दरों को प्रदर्शित करेंगे, लेकिन सरकार कीमतों को नियंत्रित नहीं करेगी।
2. आपातकालीन स्थिति में क्या अस्पताल पैसे न होने पर इलाज से मना कर सकते हैं?
नहीं, नए नियमों के अनुसार, अस्पतालों को आपातकालीन स्थिति में मरीज को स्थिर करना और बुनियादी जीवन रक्षक सहायता प्रदान करना अनिवार्य है।
| विशेषता | 2021 के नियम | 2026 प्रस्तावित बिल |
|---|---|---|
| कीमत नियंत्रण | पारदर्शिता पर जोर | केवल प्रदर्शन (कोई नियंत्रण नहीं) |
| शिकायत निवारण | जिला स्तरीय सेल और टोल-फ्री नंबर | स्पष्ट तंत्र का अभाव |
| मरीज के अधिकार | विस्तृत सुरक्षा उपाय | कुछ सुरक्षा उपायों में कटौती |