नेत्र विज्ञान के क्षेत्र में महिलाएं बड़ी संख्या में प्रवेश कर रही हैं, लेकिन नेतृत्व और निर्णय लेने वाले पदों पर उनकी भागीदारी बहुत कम है। यह लेख बताता है कि कैसे लैंगिक असमानता वैश्विक दृष्टि हानि के संकट को प्रभावित कर रही है।
- वैश्विक स्तर पर दृष्टि हानि से पीड़ित लोगों में 55% महिलाएं हैं, लेकिन नेत्र विशेषज्ञों में उनकी संख्या केवल 25-30% है।
- भारत में केवल 7.4% महिला नेत्र रोग विशेषज्ञ ही विभागाध्यक्ष (HOD) के पद पर हैं।
- करियर में ब्रेक, विशेष रूप से मातृत्व के कारण, महिलाओं के सर्जिकल कौशल और करियर की प्रगति को बाधित कर रहे हैं।
- सिर्फ मेंटरशिप नहीं, बल्कि 'स्पॉन्सरशिप' और संस्थागत बदलाव की आवश्यकता है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में, विशेष रूप से नेत्र विज्ञान (Ophthalmology) में, एक गहरा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर महिलाएं इस क्षेत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेतृत्व, शैक्षणिक भूमिकाओं और नीति निर्धारण में उनकी उपस्थिति नगण्य है। यह केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक गंभीर प्रश्न है।
वैश्विक आंकड़े एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। दुनिया भर में दृष्टि हानि (vision loss) से पीड़ित 1.1 बिलियन लोगों में से 55% महिलाएं हैं। इसका मतलब है कि पुरुषों की तुलना में 112 मिलियन अधिक महिलाएं अंधापन या दृष्टि दोष का सामना कर रही हैं। इसके विपरीत, वैश्विक नेत्र विशेषज्ञों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व केवल 25-30% है। यह असंतुलन दर्शाता है कि स्वास्थ्य प्रणालियों को डिजाइन करने वाले निर्णय लेने वाले पदों पर महिलाओं की कमी है।
भारत में नेतृत्व का संकट
भारत की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित एक सर्वेक्षण के अनुसार, महिला नेत्र रोग विशेषज्ञों में से केवल 7.4% ही विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। अध्ययन से पता चलता है कि लगभग 79.5% महिलाओं ने बताया कि मातृत्व के कारण उनके करियर में अस्थायी बाधा आई, और 49% को लगा कि इस ब्रेक ने उनके नैदानिक या सर्जिकल कौशल के विकास को प्रभावित किया।
नेत्र स्वास्थ्य का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम कितनी प्रभावी ढंग से उन महिलाओं को बनाए रखते हैं और आगे बढ़ाते हैं जो पहले से ही इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी हैं।
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि समस्या प्रवेश (entry) की नहीं, बल्कि प्रगति (progression) की है। महिलाओं को विशेषज्ञ बनने के बाद सर्जिकल वॉल्यूम, फेलोशिप, अनुसंधान और प्रभावशाली नेटवर्क तक समान पहुंच नहीं मिल पाती है। जब तक करियर ब्रेक को स्थायी दंड के रूप में देखा जाएगा, तब तक विशेषज्ञता का नुकसान होता रहेगा।
मेंटरशिप बनाम स्पॉन्सरशिप
अक्सर यह माना जाता है कि महिलाओं को केवल 'मेंटर' (मार्गदर्शक) की आवश्यकता है, लेकिन वास्तव में उन्हें 'स्पॉन्सर' (प्रायोजक) की आवश्यकता है। एक मेंटर आपको सलाह दे सकता है, लेकिन एक स्पॉन्सर वह वरिष्ठ पेशेवर होता है जो सक्रिय रूप से आपको नेतृत्व की भूमिकाओं, अनुसंधान सहयोग और महत्वपूर्ण समितियों के लिए अनुशंसित करता है।
संस्थागत परिवर्तन की आवश्यकता
स्वास्थ्य संस्थानों को अपने ढांचे में बदलाव करना होगा। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को पारदर्शी पदोन्नति मानदंड, अनुसंधान निधि तक समान पहुंच और ऐसे नेतृत्व मार्ग बनाने चाहिए जो करियर के अंतराल (career gaps) को स्वीकार करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. नेत्र विज्ञान में महिलाओं के लिए मुख्य बाधाएं क्या हैं?
मुख्य बाधाओं में करियर में अंतराल (विशेषकर मातृत्व के कारण), सर्जिकल अवसरों की कमी, और नेतृत्व के पदों तक सीमित पहुंच शामिल हैं।
2. 'स्पॉन्सरशिप' मेंटरशिप से कैसे अलग है?
मेंटरशिप सलाह देने के बारे में है, जबकि स्पॉन्सरशिप आपको महत्वपूर्ण अवसरों और पदों के लिए सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने और सिफारिश करने के बारे में है।