बेंगलुरु के डॉक्टरों ने एक 28 वर्षीय महिला के शरीर से 4.65 किलोग्राम का विशाल 'परजीवी फाइब्रॉइड' सफलतापूर्वक निकाला है। यह सर्जरी बेहद जटिल थी क्योंकि ट्यूमर का वजन एक नवजात शिशु से भी अधिक था।
- बेंगलुरु के मदरहुड अस्पताल में एक जटिल लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से 4.65 किलोग्राम का फाइब्रॉइड हटाया गया।
- ट्यूमर का वजन एक पूर्णकालिक नवजात शिशु से भी अधिक था।
- डॉक्टरों ने महिला के गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए यह सफल ऑपरेशन किया।
- यह एक दुर्लभ 'परजीवी फाइब्रॉइड' था जिसे ओमेंटम से अतिरिक्त रक्त आपूर्ति मिल रही थी।
बेंगलुरु: कर्नाटक के तटीय क्षेत्र की एक 28 वर्षीय महिला के लिए चिकित्सा विज्ञान ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने एक महिला के शरीर से 4.65 किलोग्राम का विशाल गर्भाशय फाइब्रॉइड (Uterine Fibroid) निकालने में सफलता प्राप्त की है। यह ट्यूमर इतना बड़ा था कि इसका वजन एक पूर्ण विकसित नवजात शिशु के वजन से भी अधिक था।
सर्जरी की जटिलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्यूमर का आकार इतना बड़ा था कि उसे सामान्य लैप्रोस्कोपिक छिद्रों के माध्यम से बाहर नहीं निकाला जा सकता था। इसके लिए डॉक्टरों ने 5 मिमी के लैप्रोस्कोपिक चीरे और एक विशेष 'मिनी-लैपरोटॉमी मोर्सिलेशन' तकनीक का उपयोग किया। डॉक्टरों ने ट्यूमर को छोटे टुकड़ों में काटकर एक छोटे 4-सेमी के चीरे के माध्यम से बाहर निकाला, जिससे महिला का गर्भाशय भी सुरक्षित रहा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक सफल सर्जरी नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य में आ रहे नए खतरों की ओर भी इशारा करता है। यह एक दुर्लभ 'परजीवी फाइब्रॉइड' (Parasitic Fibroid) था, जिसे ओमेंटम (पेट के अंगों को ढकने वाली वसायुक्त ऊतक) से अतिरिक्त रक्त आपूर्ति मिल रही थी। इसकी स्थिति गर्भाशय की पार्श्व दीवार पर थी, जो प्रमुख पेल्विक रक्त वाहिकाओं और मूत्रवाहिनी (Ureter) के बेहद करीब थी। ऐसी स्थिति में सर्जरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव का जोखिम 19% तक बढ़ जाता है।
"यह एक तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण सर्जरी थी क्योंकि हम एक बहुत ही सीमित स्थान में एक असाधारण रूप से बड़े फाइब्रॉइड का सामना कर रहे थे," डॉ. माधुरी विद्याशंकर पी. ने कहा।
डॉक्टरों की टीम ने इस जटिलता से निपटने के लिए छह सप्ताह तक मरीज के बढ़े हुए थायराइड स्तर को स्थिर करने और हीमोग्लोबिन को अनुकूलित करने पर काम किया। इसके बाद ही वे रक्त वाहिकाओं को सफलतापूर्वक अलग करने और गर्भाशय की दीवार का पुनर्निर्माण करने में सक्षम हुए।
ऐतिहासिक संदर्भ और बढ़ता खतरा
ऐतिहासिक रूप से, फाइब्रॉइड की समस्या आमतौर पर मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में देखी जाती थी। हालांकि, हाल के वर्षों में डेटा यह संकेत दे रहा है कि भारत में किशोरियों और युवा महिलाओं में फाइब्रॉइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज' अध्ययन के अनुसार, भारत में फाइब्रॉइड की घटना दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. परजीवी फाइब्रॉइड क्या है?
यह एक दुर्लभ स्थिति है जहाँ फाइब्रॉइड अपनी रक्त आपूर्ति के लिए शरीर के अन्य ऊतकों (जैसे ओमेंटम) पर निर्भर हो जाता है।
2. क्या फाइब्रॉइड के लिए गर्भाशय निकालना अनिवार्य है?
नहीं, आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीकों के माध्यम से गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए भी फाइब्रॉइड को हटाया जा सकता है।