बेंगलुरु के अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. प्रदीप कृष्णा ने बढ़ती मांग को पूरा करने और मरीजों को नया जीवन देने के लिए अंग दान करने का आह्वान किया है। भारत में अंग प्रत्यारोपण की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर चिंताजनक स्तर पर है।
- भारत में मार्च 2026 तक 90,000 से अधिक मरीज अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं।
- 2025 में देश भर में 20,000 से अधिक सफल अंग प्रत्यारोपण किए गए।
- ब्रेन-डेड (मस्तिष्क मृत) व्यक्तियों से हृदय, किडनी और फेफड़े दान किए जा सकते हैं।
- लिवर का एक हिस्सा जीवित व्यक्ति द्वारा भी दान किया जा सकता है।
शिवमोगा में आयोजित 'विश्व अंग दान दिवस' के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम के दौरान, अपोलो अस्पताल, बेंगलुरु के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. के.वी. प्रदीप कृष्णा ने समाज से अंग दान करने की भावुक अपील की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंग दान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, जो किसी मरते हुए व्यक्ति को जीवन का दूसरा अवसर प्रदान कर सकती है।
डॉ. कृष्णा ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि हालांकि 2025 में भारत में 20,000 से अधिक प्रत्यारोपण किए गए, लेकिन मांग अभी भी आपूर्ति से कहीं अधिक है। नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक देश भर में 90,000 से अधिक मरीज प्रमुख अंगों के प्रत्यारोपण के लिए प्रतीक्षा सूची में हैं। यह अंतर चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अंग दान के प्रति जागरूकता की कमी ही वह मुख्य कारण है जिसकी वजह से हजारों लोग जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उन्नत चिकित्सा तकनीक के बावजूद, अंगों की कमी एक गंभीर संकट पैदा कर रही है।
अंग दान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह किसी के जीवन की लौ को फिर से जलाने का सबसे शक्तिशाली माध्यम है।
डॉ. कृष्णा ने स्पष्ट किया कि 'ब्रेन-डेड' यानी मस्तिष्क मृत घोषित किए गए व्यक्तियों के अंगों का उपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों के पैनल द्वारा पुष्टि के बाद, उनके हृदय, गुर्दे और फेफड़े अन्य मरीजों को दिए जा सकते हैं। इसके लिए परिवार के सदस्यों की सहमति और त्वरित निर्णय प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रत्यारोपण के लिए एक सख्त समय सीमा का पालन करना होता है।
लिवर प्रत्यारोपण के संबंध में बात करते हुए, उन्होंने बताया कि क्रोनिक लिवर रोग से पीड़ित व्यक्ति लिवर ट्रांसप्लांट के बाद एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। विशेष बात यह है कि एक जीवित व्यक्ति भी अपने लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है। कार्यक्रम में शिवमोगा के निवासी राजशेखरैया ने अपना अनुभव साझा किया, जिन्होंने चार महीने पहले लिवर प्रत्यारोपण कराया था और उनकी बेटी ने उन्हें नया जीवन देने के लिए अपने लिवर का हिस्सा दान किया था।
Historical Background
भारत में अंग प्रत्यारोपण का क्षेत्र पिछले दो दशकों में तेजी से विकसित हुआ है। NOTTO की स्थापना के बाद से, अंगों के आवंटन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है, लेकिन सामाजिक भ्रांतियों और जागरूकता के अभाव ने अभी भी इस क्षेत्र को एक कठिन चुनौती बना रखा है।
Frequently Asked Questions
1. क्या जीवित व्यक्ति अंग दान कर सकता है?
हाँ, एक जीवित व्यक्ति अपने लिवर का एक हिस्सा या एक किडनी दान कर सकता है।
2. ब्रेन-डेड व्यक्ति से कौन से अंग लिए जा सकते हैं?
विशेषज्ञों की पुष्टि के बाद, हृदय, फेफड़े, गुर्दे और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग लिए जा सकते हैं।