भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लॉरफ़ेनिरामीन मालिएट और फेनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड‑डोज़ कफ़‑भारी दवाओं पर कड़ी पाबंदी लगाई। अब सभी पैकेजों पर ‘4 वर्ष से कम बच्चों के लिए निषेध’ का स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य किया गया है।
- क्लॉरफ़ेनिरामीन और फेनाइलएफ्रिन वाले कॉम्बो दवाओं को 4 वर्ष से कम बच्चों में उपयोग प्रतिबंधित।
- उत्पाद पैकेज पर स्पष्ट चेतावनी लेबल अनिवार्य।
- उपयोग न करने से गंभीर दुष्प्रभावों से बचाव संभव।
नए नियमों का सारांश
भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 अगस्त 2026 को एक अधिसूचना जारी की, जिसमें फिक्स्ड‑डोज़ कफ़‑भारी दवाओं (जिनमें क्लॉरफ़ेनिरामीन मालिएट और फेनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड दोनों मौजूद हैं) के उपयोग को चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित किया गया। इस दिशा‑निर्देश में निर्माता कंपनियों को ऐसे दवाओं के पैकेज पर ‘4 वर्ष से कम बच्चों में उपयोग न करें’ का स्पष्ट चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य किया गया है।
प्रमुख घटक और उनका जोखिम
क्लॉरफ़ेनिरामीन मालिएट एक एंटीहिस्टामिन है, जो अक्सर सर्दी‑जुकाम की दवाओं में पाया जाता है। जबकि वयस्कों में यह सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है, बच्चों में यह हृदय गति में अनियमितता, अत्यधिक नींद और कभी‑कभी गंभीर न्यूरोलॉजिकल दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। फेनाइलएफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड एक डीकंजेस्टेंट है, जो रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर नाक की सूजन घटाता है। छोटे बच्चों में यह रक्तचाप बढ़ा सकता है और हृदय गति तेज कर सकता है, जिससे संभावित जीवन‑धमकी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दशक में कई विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राष्ट्रीय नियामक एजेंसियों ने बच्चों में एंटीहिस्टामिन‑डीकंजेस्टेंट संयोजन के जोखिम को उजागर किया। 2015 में यूके में इसी प्रकार के संयोजन को बच्चों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था, जबकि भारत में इस पर पहले कोई कठोर नियमन नहीं था। 2022‑2024 की अवधि में भारत में कई केस रिपोर्टों में चार वर्ष से कम बच्चों में इन दवाओं के कारण तीव्र हृदय‑श्वसन संकट दर्ज किया गया, जिससे नीति निर्माताओं को कार्रवाई की आवश्यकता महसूस हुई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the new label requirement could reduce pediatric emergency admissions by up to 30% within the first year, saving thousands of lives and easing pressure on India’s overburdened public hospitals.
"बच्चों में सर्दी‑जुकाम के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक उपाय और केवल पैरासिटामोल जैसी सुरक्षित दवाओं का उपयोग ही सबसे प्रभावी है," प्रो. अंजली सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा।
भविष्य की दिशा
नियमों के कार्यान्वयन के साथ, सरकार ने फार्मास्यूटिकल कंपनियों को 90 दिनों के भीतर मौजूदा उत्पादों पर नया लेबल लगाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, उपभोक्ता जागरूकता अभियानों के माध्यम से माता‑पिता को सही दवा चयन के बारे में शिक्षित करने की योजना है।
Frequently Asked Questions
प्र. क्या मौजूदा दवाओं को रिटर्न करके बदला जा सकता है?
उ. हाँ, अधिकांश फार्मेसियों और अस्पतालों में रिटर्न नीति लागू है, बशर्ते दवा खुली न हो।
प्र. अगर बच्चा पहले से ही इन दवाओं का सेवन कर चुका है तो क्या करें?
उ. तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें; लक्षणों की निगरानी के लिए एम्बुलेंस या नजदीकी अस्पताल में जाएँ।