हैदराबाद के सिटीज़न स्पेशल्टी हॉस्पिटल में दो महीने के शिशु ने रोबोटिक पाइलोप्लास्टी करवाई, जिससे छोटे चीरे और तेज़ रिकवरी संभव हुई। यह भारत में सबसे कम उम्र के रोगियों में से एक है जिन्होंने इस तकनीक का लाभ उठाया है।

  • 2 महीने की शिशु ने रोबोटिक पाइलोप्लास्टी करवाई
  • हैदराबाद के सिटीज़न स्पेशल्टी हॉस्पिटल ने सफलतापूर्वक प्रक्रिया पूरी की
  • रोबोटिक सर्जरी से छोटे चीरे, कम रक्तस्राव और तेज़ रिकवरी मिली

प्रक्रिया का विवरण

प्रभु करुणाकरन, कंसल्टेंट पेडियाट्रिक यूरोलॉजिस्ट ने शिशु की किडनी‑यूरेटर समस्या को ठीक करने के लिये रोबोट‑सहायता प्राप्त पाइलोप्लास्टी की। पारंपरिक खुले ऑपरेशन की बजाय रोबोटिक प्रणाली का उपयोग किया गया, जिससे न्यूनतम चीरे और कम रक्तस्राव हुआ। ऑपरेशन दो घंटे से कम समय में समाप्त हुआ और बच्चा दो दिन बाद सुरक्षित रूप से डिस्चार्ज किया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सिटीज़न स्पेशल्टी हॉस्पिटल ने 2023 में मलिकरुजना रेड्डी द्वारा 21‑दिन के नवजात शिशु पर रोबोटिक सर्जरी करवाई थी। यह वर्तमान केस को अस्पताल की दूसरी बड़ी उपलब्धि बनाता है, जहाँ विभिन्न विशेषज्ञों ने अलग‑अलग उम्र के शिशुओं पर सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी की है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that pediatric robotic surgery is rapidly becoming a game‑changer in India, offering reduced postoperative pain, shorter hospital stays, and better long‑term outcomes for the most vulnerable patients.

"रोबोटिक सर्जरी ने शिशु रोगियों के उपचार में नई दिशा दी है," कहा प्रो. अजय सिंह, बाल रोग विशेषज्ञ।
Did You Know?: भारत में 2022 में केवल 15% प्रमुख अस्पतालों में रोबोटिक पाइलोप्लास्टी उपलब्ध थी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: रोबोटिक पाइलोप्लास्टी क्या है?
उत्तर: यह एक न्यूनतम आक्रमण वाली सर्जरी है जिसमें रोबोटिक आर्म्स की मदद से किडनी‑यूरेटर के कंजेशन को ठीक किया जाता है।

प्रश्न 2: शिशु को इस प्रक्रिया के बाद कितने समय में घर भेजा गया?
उत्तर: शिशु को ऑपरेशन के दो दिन बाद घर भेजा गया, जिससे यह साबित होता है कि रिकवरी समय बहुत तेज़ था।