महाराष्ट्र में लिंग चयन और अवैध गर्भपात का काला कारोबार अब रजिस्टर्ड क्लीनिकों से निकलकर घरों और पोर्टेबल मशीनों तक पहुंच गया है, जिससे कानून प्रवर्तन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
- अवैध लिंग निर्धारण का कारोबार अब रजिस्टर्ड केंद्रों से हटकर घरों और अस्थायी ठिकानों पर शिफ्ट हो गया है।
- पोर्टेबल टैबलेट-आधारित सोनोग्राफी मशीनों के बढ़ते उपयोग से पुलिस के लिए छापेमारी करना कठिन हो गया है।
- महाराष्ट्र में लिंगानुपात में सुधार की दर बेहद धीमी है, जो सामाजिक कुरीतियों की गहराई को दर्शाती है।
महाराष्ट्र में लिंग निर्धारण का अवैध नेटवर्क अब एक नए और खतरनाक रूप में सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की हालिया जांच और स्टिंग ऑपरेशन से पता चला है कि PCPNDT अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अपराधी अब बड़े अस्पतालों के बजाय घरों और अस्थायी स्थानों का उपयोग कर रहे हैं। अपराधी अब पोर्टेबल टैबलेट-आधारित सोनोग्राफी मशीनों का उपयोग कर रहे हैं, जिन्हें आसानी से छिपाया जा सकता है और एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है, जिससे पुलिस की छापेमारी का खतरा कम हो जाता है।
हाल ही में अकोला से बुलढाणा के बीच संचालित हो रहे एक रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक 'डिकॉय' (छद्म महिला) का उपयोग किया। इस ऑपरेशन में एक unregistered केंद्र से पोर्टेबल मशीन और दवाएं जब्त की गईं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे मांग और आपूर्ति का यह अवैध चक्र अब पूरी तरह से 'अंडरग्राउंड' हो चुका है।
क्यों यह चिंता का विषय है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लिंग चयन की यह मांग केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से भी जुड़ी है। जब महिलाएं असुरक्षित और अस्वच्छ परिस्थितियों में अवैध गर्भपात कराती हैं, तो उनके जीवन पर गंभीर खतरा मंडराता है। कोल्हापुर की एक हृदयविदारक घटना में, एक महिला का गर्भाशय फट गया क्योंकि उसने लिंग पता चलने के बाद अवैध तरीके से गर्भपात कराने की कोशिश की थी।
अवैध लिंग निर्धारण का बदलता स्वरूप कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक नई और जटिल चुनौती पेश कर रहा है।
लिंगानुपात का कड़वा सच
महाराष्ट्र के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति भयावह है। 2022-24 के दौरान, प्रति 1,000 लड़कों पर केवल 899 लड़कियां पैदा हुईं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार देखा गया है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में लिंगानुपात में गिरावट आई है। शहरी महाराष्ट्र का लिंगानुपात अब हरियाणा के औसत स्तर के करीब पहुंच गया है, जो एक चिंताजनक संकेत है।
| क्षेत्र | लिंगानुपात (प्रति 1000 लड़के) | प्रवृत्ति |
|---|---|---|
| ग्रामीण महाराष्ट्र | 910 | सुधार |
| शहरी महाराष्ट्र | 885 | गिरावट |
| राष्ट्रीय औसत | 918 | स्थिर |
कानूनी कार्रवाई के बावजूद, सजा की दर अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच दर्ज किए गए 627 मामलों में से केवल 127 में ही दोषसिद्धि (conviction) हो पाई। अधिकांश मामले या तो खारिज हो जाते हैं या लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंस जाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में लिंग चयन को रोकने के लिए Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques (PCPNDT) Act को लागू किया गया था। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को रोकना और समाज में लैंगिक संतुलन बनाए रखना है। हालांकि, तकनीक के विकास के साथ, अपराधी अब डिजिटल और पोर्टेबल उपकरणों का सहारा ले रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. PCPNDT अधिनियम क्या है?
यह कानून गर्भधारण से पहले और प्रसव पूर्व नैदानिक तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाया गया है ताकि लिंग चयन को रोका जा सके।
2. पोर्टेबल मशीनें जांच में कैसे बाधा डालती हैं?
इन मशीनों को आसानी से छिपाया जा सकता है और बिना किसी पंजीकरण के घर के भीतर संचालित किया जा सकता है, जिससे नियमित निरीक्षण करना कठिन हो जाता है।