पूर्व WHO वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने H1N1 और मौसमी फ्लू के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कोविड-19 के दौरान अपनाई गई बुनियादी स्वच्छता और सावधानियों को भूलना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- कोविड-19 के दौरान मास्क और स्वच्छता ने फ्लू के प्रसार को कम किया था, जिसे अब लोग भूल रहे हैं।
- एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के खतरे को बढ़ा रहा है।
- फ्लू वैक्सीन के प्रति जागरूकता की कमी और लागत भारत में टीकाकरण की मुख्य बाधाएं हैं।
भारत में H1N1 और अन्य इन्फ्लूएंजा मामलों में अचानक आई तेजी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व WHO मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का मानना है कि वर्तमान स्थिति इस बात का संकेत है कि समाज ने कोविड-19 महामारी के दौरान सीखे गए महत्वपूर्ण सबक भुला दिए हैं। उनके अनुसार, मास्क पहनना, हाथों की स्वच्छता और सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से परहेज करने जैसी आदतों ने महामारी के दौरान फ्लू के प्रसार को न्यूनतम स्तर पर ला दिया था, लेकिन अब इन आदतों का गायब होना चिंताजनक है।
मौसमी फ्लू और बदलता मानवीय व्यवहार
डॉ. स्वामीनाथन ने स्पष्ट किया कि मौसमी इन्फ्लूएंजा कोई नई घटना नहीं है और यह साल के विशेष समय में बढ़ता है। हालांकि, कोविड-19 के दौरान मानवीय व्यवहार में आए बदलाव ने वायरस के प्रसार को रोक दिया था। सोशल डिस्टेंसिंग और बेहतर श्वसन स्वच्छता के कारण फ्लू के मामले नाटकीय रूप से गिर गए थे। अब जब लोग फिर से पुरानी आदतों पर लौट आए हैं, तो वायरस को फैलने का मौका मिल रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को जोखिम में डालती है। जब हम बुनियादी स्वच्छता को नजरअंदाज करते हैं, तो स्वास्थ्य प्रणालियों पर बोझ बढ़ता है और कमजोर आबादी (बुजुर्ग और बच्चे) के लिए खतरा और अधिक हो जाता है।
"मौसमी फ्लू को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि यह हर साल आता है; यह वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बीमारी और मृत्यु का कारण बनता है।"
टीकाकरण और एंटीबायोटिक दवाओं का दुरुपयोग
डॉ. स्वामीनाथन ने फ्लू वैक्सीन लेने की पुरजोर सलाह दी है। उन्होंने बताया कि वैक्सीन का प्रभाव विकसित होने में लगभग दो सप्ताह का समय लगता है, इसलिए मामलों के और बढ़ने का इंतजार नहीं करना चाहिए। भारत में टीकाकरण की कम दर का मुख्य कारण जागरूकता की कमी और लागत है।
इसके साथ ही, उन्होंने बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स लेने की प्रवृत्ति पर कड़ी चेतावनी दी है। चूंकि इन्फ्लूएंजा एक वायरस है, इसलिए एंटीबायोटिक्स इस पर बेअसर होते हैं। इनका अनावश्यक उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को जन्म देता है, जिससे भविष्य में गंभीर संक्रमणों का इलाज करना असंभव हो सकता है।
| कारक | कोविड-19 काल | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| मास्क का उपयोग | व्यापक और अनिवार्य | न्यूनतम और अनियमित |
| हाथों की स्वच्छता | उच्च प्राथमिकता | उपेक्षा की जा रही है |
| फ्लू प्रसार | अत्यंत कम | तेजी से बढ़ रहा है |
Frequently Asked Questions
1. क्या फ्लू जैसे लक्षणों वाले हर व्यक्ति को RT-PCR टेस्ट कराना चाहिए?
नहीं, डॉ. स्वामीनाथन के अनुसार, टेस्ट की आवश्यकता डॉक्टर लक्षणों और जोखिम कारकों के आधार पर तय करते हैं।
2. क्या ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं सुरक्षित हैं?
हाँ, लेकिन इन्हें केवल डॉक्टर के पर्चे पर और गंभीरता के आकलन के बाद ही लेना चाहिए; स्वयं दवा लेना खतरनाक हो सकता है।