तमिलनाडु के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में इंटरसेक्स बच्चों के लिए आवश्यक 'कैरियोटाइपिंग' जैसे आनुवंशिक परीक्षण उपलब्ध नहीं हैं, जिससे परिवारों को महंगे निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए बुनियादी ढांचे में सुधार की मांग की है।

  • तमिलनाडु के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में इंटरसेक्स बच्चों के लिए आवश्यक 'कैरियोटाइपिंग' परीक्षण उपलब्ध नहीं हैं।
  • परिवारों को आनुवंशिक परीक्षणों के लिए निजी लैब पर भारी खर्च करना पड़ रहा है।
  • राज्य के 38 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में से केवल एक (इन्स्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, एग्मोर) में समर्पित आनुवंशिक विभाग है।
  • विशेषज्ञों ने 'नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग' (NGS) जैसी उन्नत सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया है।

तमिलनाडु में इंटरसेक्स गुणों के साथ पैदा हुए बच्चों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। हालांकि राज्य सरकार ने सात साल पहले बच्चों की शारीरिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए लिंग-परिवर्तन सर्जरी (sex-reassignment surgeries) पर प्रतिबंध लगाकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि निदान के लिए आवश्यक आनुवंशिक बुनियादी ढांचे की भारी कमी है।

इंटरसेक्स बच्चों के निदान के लिए कैरियोटाइपिंग (Karyotyping) एक अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षण है। यह परीक्षण कोशिकाओं के नमूने में गुणसूत्रों (chromosomes) के आकार, आकृति और संख्या की जांच करता है। यह परीक्षण यह समझने में मदद करता है कि बच्चे के गुणसूत्र XX, XY या मिश्रित प्रकार के हैं। दुर्भाग्य से, तमिलनाडु के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण परिवारों को निजी प्रयोगशालाओं में ₹1,500 से ₹2,500 तक खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आनुवंशिक परीक्षणों की अनुपलब्धता न केवल आर्थिक बोझ डालती है, बल्कि गलत चिकित्सा निर्णयों का जोखिम भी बढ़ाती है। यदि सही समय पर आनुवंशिक परीक्षण नहीं किए जाते हैं, तो बच्चों की अनचाही और अपरिवर्तनीय सर्जरी (जैसे गोनाड हटाना) होने का खतरा बढ़ जाता है, जो उनके भविष्य के स्वास्थ्य और स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है।

सटीक आनुवंशिक निदान के बिना, इंटरसेक्स बच्चों के प्रबंधन में त्रुटियों की संभावना बनी रहती है, जो उनके शारीरिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।

राजাজি अस्पताल, मदुरै के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार, अस्पताल में हर महीने एक से दो ऐसे मामले आते हैं। उन्होंने बताया कि जटिल आनुवंशिक परीक्षणों के बिना, विशेष रूप से कंजेनिटल एड्रेनल हाइपरप्लासिया (CAH) जैसी स्थितियों में, सही प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। वर्तमान में, तमिलनाडु के 38 मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में से केवल इन्स्टिट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (ICH), एग्मोर में ही समर्पित आनुवंशिक विभाग है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को केवल बुनियादी परीक्षणों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नेक्स्ट-जेनरेशन सीक्वेंसिंग (NGS) जैसी उन्नत तकनीकों में भी निवेश करना चाहिए। इससे न केवल इंटरसेक्स बच्चों, बल्कि अन्य दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के निदान में भी मदद मिलेगी।

Did You Know?: कैरियोटाइपिंग एक ऐसा परीक्षण है जो शारीरिक बनावट से स्पष्ट न होने वाले गुणसूत्र पैटर्न का खुलासा कर सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कैरियोटाइपिंग परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह परीक्षण बच्चे के गुणसूत्रों की संरचना की जांच करता है, जो इंटरसेक्स स्थितियों के सटीक निदान के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 2: तमिलनाडु में वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: अधिकांश सरकारी अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है, जिससे परिवारों को निजी लैब पर निर्भर रहना पड़ता है।