भारत के अस्पतालों में आईसीयू (ICU) और एनआईसीयू (NICU) में आग लगने की बढ़ती घटनाएं एक गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। ऑक्सीजन युक्त वातावरण और बिजली के उपकरणों की खराबी इन संवेदनशील क्षेत्रों को अत्यधिक जोखिम में डाल रही है।

  • आईसीयू और एनआईसीयू में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो नवजात शिशुओं के लिए घातक साबित हो रही हैं।
  • ऑक्सीजन की प्रचुरता और बिजली के उपकरणों का अत्यधिक भार आग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
  • विशेषज्ञों ने आईसीयू के लिए अलग सुरक्षा प्रोटोकॉल और अनिवार्य फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट की मांग की है।

भारत में आग लगने की घटनाओं का स्वरूप बदल रहा है। जहाँ पहले आग मुख्य रूप से औद्योगिक इकाइयों, रेलवे या बड़े समारोहों तक सीमित थी, वहीं पिछले 15 वर्षों में आवासीय भवनों, होटलों और विशेष रूप से अस्पतालों के इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में आग लगने की घटनाएं बढ़ी हैं। वर्तमान में, बिजली के उपकरणों का बढ़ता उपयोग और खराब रखरखाव मुख्य कारण बनकर उभरे हैं।

अत्यधिक संवेदनशील वातावरण

आईसीयू के भीतर का वातावरण आग के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है। यहाँ ऑक्सीजन की उच्च सांद्रता होती है, जो किसी भी छोटी चिंगारी को भीषण आग में बदल सकती है। हाल ही में महाराष्ट्र के अमरावती और मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में हुई दुर्घटनाओं ने इस संकट को उजागर किया है। अमरावती की घटना में वेंटिलेटर की खराबी संदिग्ध मानी जा रही है, जबकि छिंदवाड़ा में वॉर्मर में शॉर्ट सर्किट के कारण नवजात शिशुओं को गंभीर रूप से झुलसना पड़ा।

ऐतिहासिक रूप से, 2024 में झांसी में हुई आग, जिसमें 18 नवजात शिशुओं की जान चली गई थी, एक बड़ा चेतावनी संकेत थी, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा मानकों में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आईसीयू में आग लगने की घटनाएं केवल तकनीकी विफलता नहीं हैं, बल्कि यह बुनियादी ढांचे और सुरक्षा ऑडिट की कमी को दर्शाती हैं। आईसीयू एक 'सीलबंद कक्ष' की तरह काम करते हैं जहाँ धुआँ बहुत तेजी से भर जाता है, जिससे मरीजों को बचाना लगभग असंभव हो जाता है।

आईसीयू के लिए विशेष निकासी प्रोटोकॉल और बिजली की गुणवत्ता का नियमित ऑडिट अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है।

सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, आईसीयू को एक अलग श्रेणी के रूप में माना जाना चाहिए। एक आदर्श आईसीयू सेटअप में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए:

  • कम से कम तीन स्वतंत्र निकास द्वार।
  • स्वचालित स्प्रिंकलर सिस्टम और स्वतंत्र बिजली लाइनें।
  • ऑक्सीजन आउटलेट को बिजली के सॉकेट से दूर रखना।
  • हर दो साल में अनिवार्य फायर ड्रिल।

इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रिकल हार्मोनिक्स एक अदृश्य खतरा है। एनआईसीयू उपकरण अक्सर विकृत करंट (distorted current) खींचते हैं, जो वायरिंग और ट्रांसफार्मर को बिना किसी ट्रिपिंग के धीरे-धीरे गर्म कर सकता है, जिससे अंततः शॉर्ट सर्किट होता है।

Did You Know?: आईसीयू में ऑक्सीजन की उपस्थिति आग की लपटों की तीव्रता को कई गुना बढ़ा सकती है और उन्हें अधिक तेजी से फैला सकती है।

Frequently Asked Questions

1. आईसीयू में आग लगने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारणों में बिजली के उपकरणों का ओवरलोड, खराब रखरखाव, शॉर्ट सर्किट और ऑक्सीजन युक्त वातावरण शामिल हैं।

2. 'RACE' प्रोटोकॉल क्या है?
यह एक आपातकालीन निकासी प्रक्रिया है: Rescue (बचाव), Alarm (अलार्म), Confine (घेराबंदी), और Extinguish/Evacuate (बुझाना या बाहर निकलना)।