अभिनेत्री श्वेता कावत्रा ने मेनोपॉज के दौरान मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए वेट ट्रेनिंग को एक 'गेम-चेंजर' बताया है। उन्होंने साझा किया कि कैसे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इस उम्र में भी उन्हें फिट बनाए रखने में मदद कर रही है।
- मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट आती है, जिससे हड्डियों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है।
- वेट ट्रेनिंग हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने और ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम को कम करने में मदद करती है।
- स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- नियमितता तीव्रता से अधिक महत्वपूर्ण है।
अभिनेत्री श्वेता कावत्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे 50 की उम्र में भी वे खुद को अत्यधिक फिट महसूस करती हैं। उन्होंने गर्व से कहा कि वे अभी भी अपनी किशोरावस्था की तुलना में अधिक बेहतर तरीके से स्क्वाट्स (squats) लगा सकती हैं। उनका यह संदेश विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के दौर से गुजर रही हैं।
मेनोपॉज केवल मासिक धर्म चक्र का अंत नहीं है, बल्कि यह शरीर में महत्वपूर्ण हार्मोनल बदलावों का दौर है। Wockhardt Hospitals, मुंबई की सलाहकार स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा भारद्वाज के अनुसार, इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी गिर जाता है। यह हार्मोन हड्डियों के घनत्व, मांसपेशियों के द्रव्यमान और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि आधुनिक जीवनशैली में मेनोपॉज के दौरान शारीरिक सक्रियता की कमी महिलाओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। वेट ट्रेनिंग केवल शरीर को आकार देने के लिए नहीं, बल्कि हार्मोनल उतार-चढ़ाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है और कम एस्ट्रोजन स्तर के बावजूद शरीर को कुशलतापूर्वक कार्य करने में सक्षम बनाती है।
हड्डियों के स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए, KIMS Hospitals, ठाणे के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सारंग देशपांडे ने बताया कि वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों बनाने वाली कोशिकाओं को उत्तेजित करते हैं। यह मेनोपॉज के बाद होने वाले ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके अलावा, मांसपेशियों का द्रव्यमान उम्र के साथ स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग न केवल इस नुकसान को रोकती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी सक्रिय रखती है, जिससे वजन प्रबंधन और ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है।
| विशेषता | मेनोपॉज के दौरान प्रभाव | वेट ट्रेनिंग का लाभ |
|---|---|---|
| हड्डियों का घनत्व | कम होता है (ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा) | हड्डियों को मजबूत बनाती है |
| मांसपेशियां | द्रव्यमान में कमी आती है | मांसपेशियों का निर्माण और संरक्षण |
| मेटाबॉलिज्म | धीमा हो जाता है | मेटाबॉलिज्म को तेज रखती है |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या मेनोपॉज में भारी वजन उठाना सुरक्षित है?
उत्तर: हाँ, यदि आप सही तकनीक का उपयोग करें और अपने शरीर की क्षमता के अनुसार शुरुआत करें। विशेषज्ञ सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है।
प्रश्न 2: सप्ताह में कितनी बार एक्सरसाइज करनी चाहिए?
उत्तर: विशेषज्ञ सप्ताह में 2 से 3 बार बुनियादी रेजिस्टेंस एक्सरसाइज की सलाह देते हैं।