एआईजी हॉस्पिटल, हैदराबाद ने इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) पर विशेष ध्यान देते हुए गट माइक्रोबायोम थेराप्यूटिक्स और पिल लैब का उद्घाटन किया। यह सुविधा वैज्ञानिक रूप से स्क्रीन किए गए डोनर सामग्री से मौखिक माइक्रोबायोम कैप्सूल विकसित करने के लिए समर्पित है।
- एआईजी हॉस्पिटल ने गट माइक्रोबायोम थेराप्यूटिक्स और पिल लैब का शुभारंभ किया।
- प्रारंभिक शोध इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज, जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन रोग, पर केंद्रित है।
- डोनर‑स्क्रीनिंग से लेकर कैप्सूल फॉर्मुलेशन और क्लिनिकल परीक्षण तक पूरी प्रक्रिया को कड़ाई से नियंत्रित किया जाएगा।
हैदराबाद के एआईजी हॉस्पिटल ने शनिवार, 29 अगस्त को एक समर्पित गट माइक्रोबायोम थेराप्यूटिक्स और पिल लैब का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला मानव गट माइक्रोबायोम की चिकित्सीय संभावनाओं की खोज के लिए स्थापित की गई है, जिसमें इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) को प्राथमिकता दी गई है।
लैब का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से स्क्रीन किए गए डोनर सामग्री का उपयोग करके मौखिक माइक्रोबायोम कैप्सूल तैयार करना है। प्रक्रिया में माइक्रोबायोम प्रोफाइलिंग, नियंत्रित सैंपल प्रोसेसिंग, संरक्षण, कैप्सूल फॉर्मुलेशन, गुणवत्ता एवं सुरक्षा जाँच, और क्लिनिकल रिसर्च प्रोटोकॉल शामिल हैं।
एआईजी हॉस्पिटल के चेयरमैन डी. नागेश्वर रेड्डी ने कहा कि स्वस्थ माइक्रोबायोम इकोसिस्टम की पुनर्स्थापना से क्रोनिक सूजन रोगों में महत्वपूर्ण संभावनाएँ हैं, जहाँ पारम्परिक उपचार हमेशा मूल कारण को नहीं छू पाते।
IBD सेंटर की निदेशक रूपा बनर्जी ने बताया कि यह सुविधा वैज्ञानिक गुणवत्ता, डोनर सुरक्षा, मानकीकृत प्रक्रियाएँ, ट्रेसेबिलिटी और क्लिनिकल प्रासंगिकता पर विशेष जोर देती है। “डोनर स्क्रीनिंग से लेकर कैप्सूल फॉर्मुलेशन और रोगी मॉनिटरिंग तक सभी चरण परिभाषित प्रोटोकॉल के तहत किए जाएंगे,” उन्होंने कहा।
गट माइक्रोबायोम, जो पाचन तंत्र में ट्रिलियन माइक्रोऑर्गेनिज़्म्स का समूह है, प्रतिरक्षा, सूजन, मेटाबॉलिज्म और उपचार प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। असंतुलन या डिस्बायोसिस को कई जठरांत्रीय और प्रणालीगत रोगों, विशेषकर IBD, से जोड़ा गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत में माइक्रोबायोम‑आधारित उपचारों की खोज अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल में परिवर्तनकारी क्षमता रखता है। इस लैब का स्थापित होना न केवल स्थानीय शोध को सशक्त बनाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और क्लिनिकल ट्रायल्स के लिए एक महत्वपूर्ण मंच भी प्रदान करता है।
“माइक्रोबायोम को लक्ष्य बनाकर विकसित किए गए थेरेपीज़ भविष्य में IBD जैसी जटिल बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं,” कहा गया है एक गट माइक्रोबायोम विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या यह माइक्रोबायोम कैप्सूल तुरंत बाजार में उपलब्ध होंगे?
उत्तर: नहीं, वर्तमान में इन्हें केवल अनुमोदित क्लिनिकल रिसर्च प्रोग्रामों में ही उपयोग किया जाएगा।
प्रश्न 2: डोनर सामग्री की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर: डोनर स्क्रीनिंग में विस्तृत स्वास्थ्य जांच, माइक्रोबायोम प्रोफाइलिंग और कड़े क्वालिटी कंट्रोल मानकों का पालन किया जाता है।