श्री मधुसूदन साई संस्थान को एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB) जैसे दुर्लभ आनुवंशिक विकार के किफायती निदान और उपचार विकसित करने के लिए ICMR से ₹5.5 करोड़ का अनुदान मिला है। यह चार साल का 'ADAPT-EB' प्रोजेक्ट भारत में चिकित्सा क्रांति ला सकता है।

  • ICMR ने श्री मधुसूदन साई संस्थान को ₹5.5 करोड़ का शोध अनुदान दिया है।
  • यह प्रोजेक्ट 'ADAPT-EB' के नाम से जाना जाएगा और 4 साल तक चलेगा।
  • लक्ष्य: एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB) के लिए किफायती और सटीक उपचार विकसित करना।
  • अनुसंधान से जांच लागत में 60% तक की कमी आने की उम्मीद है।

कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर जिले के मुददेनहल्ली स्थित श्री मधुसूदन साई इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (SMSIMSR) को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। संस्थान को दुर्लभ आनुवंशिक त्वचा विकार, एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB), के किफायती निदान और सटीक उपचार विकसित करने के लिए ₹5.5 करोड़ (₹5,50,08,874) का शोध अनुदान प्रदान किया गया है।

यह अनुदान चार वर्षों की अवधि के लिए दिया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य 'ADAPT-EB' प्रोजेक्ट का समर्थन करना है। इस प्रोजेक्ट का पूर्ण रूप 'Developing Accessible Diagnostics and Affordable Precision Therapies for Epidermolysis Bullosa in the Indian population' है। इस महत्वपूर्ण शोध का नेतृत्व डॉ. वंशी कृष्णा येनामंद्र करेंगे, जिसमें डॉ. दिव्या शेषाद्रि, डॉ. मनोज श्रीनिवास और डॉ. शरथ चंद्र कोंडा सह-अन्वेषक के रूप में शामिल होंगे।

क्या है एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB)?

एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (EB) आनुवंशिक विकारों का एक समूह है जिसमें त्वचा अत्यधिक नाजुक हो जाती है। मामूली घर्षण या चोट से भी त्वचा पर छाले और गहरे घाव हो सकते हैं। इसके मरीजों को पुराने घावों, निशान (scarring), पोषण संबंधी जटिलताओं और त्वचा कैंसर के बढ़ते जोखिम का सामना करना पड़ता है। भारत में वर्तमान में इस बीमारी के लिए कोई राष्ट्रीय रजिस्ट्री नहीं है और किफायती आणविक निदान (molecular diagnostics) तक पहुंच अत्यंत सीमित है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत जैसे विकासशील देश में, जहाँ स्वास्थ्य देखभाल की लागत एक बड़ी चुनौती है, इस तरह के शोध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह प्रोजेक्ट न केवल निदान की लागत को कम करेगा, बल्कि भारत में दुर्लभ बीमारियों के प्रबंधन के लिए एक नया ढांचा तैयार करेगा।

"ADAPT-EB को उन मरीजों और परिवारों की खाई को पाटने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिन्हें विशेष निदान और देखभाल तक पहुंच प्राप्त करने में कठिनाई होती है।" - डॉ. येनामंद्र

इस शोध का एक प्रमुख लक्ष्य कम लागत वाले लक्षित जीनोमिक परीक्षण विकसित करना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये परीक्षण वर्तमान 'होल-एक्सोम सीक्वेंसिंग' की तुलना में निदान लागत को 60% से अधिक कम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, शोधकर्ता 'रिवर्टेंट मोज़ेकवाद' (revertant mosaicism) का भी अध्ययन करेंगे, जो शरीर की कोशिकाओं में होने वाला एक प्राकृतिक आनुवंशिक सुधार है, ताकि रोगी-विशिष्ट पुनर्योजी उपचार (regenerative therapies) विकसित किए जा सकें।

Did You Know?: एपिडर्मोलिसिस बुलोसा को अक्सर 'बटरफ्लाई चाइल्ड सिंड्रोम' कहा जाता है क्योंकि मरीजों की त्वचा तितली के पंखों की तरह नाजुक होती है।

Frequently Asked Questions

1. ADAPT-EB प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भारतीय आबादी के लिए एपिडर्मोलिसिस बुलोसा के किफायती निदान और सटीक उपचार पद्धतियां विकसित करना है।

2. इस शोध से लागत में कितनी कमी आने की उम्मीद है?
नए जीनोमिक परीक्षणों के माध्यम से निदान की लागत में 60% से अधिक की कमी आने की संभावना है।