भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अत्यधिक नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों के लिए लाल षट्कोणीय चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उठाया गया है ताकि उपभोक्ता स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें।

  • FSSAI पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर लाल षट्कोणीय (hexagonal) चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव कर रहा है।
  • यह लेबल उन उत्पादों पर होगा जिनमें नमक, चीनी या वसा (fat) की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है।
  • लागू करने की प्रक्रिया दो चरणों में होगी: पहले दो या अधिक पोषक तत्वों के लिए, फिर केवल एक के लिए।
  • सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य के अधिकार (अनुच्छेद 21) को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाने का निर्देश दिया है।

भारत में स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल ही में एक हलफनामा दायर कर प्रस्ताव दिया है कि अत्यधिक नमक, चीनी और संतृप्त वसा (saturated fat) वाले पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर लाल षट्कोणीय (red hexagonal) चेतावनी लेबल लगाए जाएंगे। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक याचिका के जवाब में लिया गया है, जो उपभोक्ताओं को उनके द्वारा खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की वास्तविक पोषण संबंधी जानकारी देने की मांग कर रही है।

FSSAI द्वारा प्रस्तावित यह 'फ्रंट ऑफ पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग' (FOPNL) योजना दो चरणों में लागू की जाएगी। पहले चरण में, केवल उन उत्पादों को लेबल करना अनिवार्य होगा जिनमें कम से कम दो हानिकारक पोषक तत्व (नमक, चीनी या वसा) अत्यधिक मात्रा में होंगे। दूसरे चरण में, इस नियम का दायरा बढ़ाकर उन उत्पादों को भी शामिल किया जाएगा जिनमें इनमें से केवल एक पोषक तत्व भी अधिक होगा।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान में खाद्य पदार्थों के पीछे लिखे बारीक अक्षरों वाले पोषण चार्ट को आम आदमी आसानी से नहीं समझ पाता। लाल रंग का यह स्पष्ट लेबल उपभोक्ताओं, विशेषकर बच्चों और संवेदनशील समूहों को तुरंत सचेत करने में मदद करेगा। यह लेबल पैकेट के पीछे लिखे पोषण चार्ट से एक पॉइंट बड़े फॉन्ट में होगा, ताकि इसे आसानी से पढ़ा जा सके।

यह कदम केवल लेबलिंग के बारे में नहीं है, बल्कि यह देश में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (NCDs) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप है।

इस मामले में सरकार का तर्क था कि पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ जैसे नमकीन को भी 'अस्वस्थ' के रूप में चिन्हित किए जाने का जोखिम है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' में 'स्वास्थ्य का अधिकार' भी शामिल है, और राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करे।

अपवाद और छूट

FSSAI ने स्पष्ट किया है कि कुछ खाद्य पदार्थों को इस लेबलिंग से छूट दी जाएगी। इसमें एकल-सामग्री वाले उत्पाद और वे खाद्य पदार्थ शामिल हैं जो स्वाभाविक रूप से वसा, चीनी या नमक से समृद्ध हैं, जैसे कि घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद

विशेषतापहला चरण (Phase 1)दूसरा चरण (Phase 2)
लागू होने का आधारदो या अधिक पोषक तत्व अधिक होने परएक भी पोषक तत्व अधिक होने पर
लेबल का प्रकारलाल षट्कोणीय चेतावनीलाल षट्कोणीय चेतावनी
Did You Know?: क्या आप जानते हैं कि अत्यधिक नमक और चीनी का सेवन सीधे तौर पर हृदय रोग और मधुमेह के जोखिम को बढ़ाता है?

Frequently Asked Questions

1. क्या सभी पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर लाल लेबल होगा?
नहीं, केवल वे उत्पाद जिनमें नमक, चीनी या वसा की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होगी, उन पर ही यह लेबल लगेगा।

2. क्या घर में बने मसालों या घी पर यह लेबल लगेगा?
नहीं, घी, तेल और चीनी जैसे स्वाभाविक रूप से उच्च पोषक तत्व वाले उत्पादों को इससे छूट दी गई है।