तमिलनाडु के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद खाली पड़े हैं या अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहे हैं, जिससे मरीजों की देखभाल और निर्णय लेने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

  • तमिलनाडु के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन और निदेशकों जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं।
  • अतिरिक्त प्रभार (FAC) के कारण प्रशासनिक कार्यों और रोगी देखभाल में देरी हो रही है।
  • चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DME) जैसे शीर्ष निकाय भी प्रभावित हैं।
  • डॉक्टरों ने नियमित नियुक्तियों के लिए एक निश्चित समयसीमा (15 मार्च) निर्धारित करने की मांग की है।

तमिलनाडु के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रशासनिक संकट गहराता जा रहा है। राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में कई महत्वपूर्ण पद या तो खाली पड़े हैं या उन्हें 'अतिरिक्त प्रभार' (Full Additional Charge - FAC) के माध्यम से चलाया जा रहा है। सरकारी डॉक्टरों का दावा है कि इस व्यवस्था के कारण अस्पतालों का प्रशासनिक कामकाज बाधित हो रहा है, जिसका सीधा असर मरीजों के इलाज और समय पर लिए जाने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों पर पड़ रहा है।

जांच में पाया गया कि राजीव गांधी सरकारी जनरल अस्पताल (RGGGH) में आंतरिक चिकित्सा, ऑर्थोपेडिक्स, जनरल सर्जरी और कार्डियोथोरेसिक सर्जरी के निदेशकों के पद खाली हैं। इसी तरह, गवर्नमेंट स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SMCH) में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और मदुरै के गवर्नमेंट राजाजी अस्पताल में बाल रोग विभाग के प्रमुख पदों पर रिक्तता है। तिरुनेलवेली, कोयंबटूर ईएसआई और तिरुवन्नामलाई के मेडिकल कॉलेजों में डीन के पद भी खाली हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जब एक अधिकारी के पास कई पदों का अतिरिक्त प्रभार होता है, तो वह किसी भी एक विभाग को पूरा समय और ध्यान नहीं दे पाता। यह केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि एक स्वास्थ्य आपातकाल की स्थिति है। विशेष रूप से कार्डियोथोरेसिक सर्जरी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में नेतृत्व की कमी से अंग प्रत्यारोपण (Transplant Services) जैसी जटिल सेवाएं कमजोर हो सकती हैं।

"जब योग्य उम्मीदवारों का पैनल पहले से तैयार होता है, तो सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद नियुक्ति होनी चाहिए; FAC का निरंतर उपयोग पद की गरिमा और प्रभावशीलता को कम करता है।"

यह समस्या केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DME) तक फैली हुई है। DME, जो राज्य के 38 मेडिकल कॉलेजों की देखरेख करता है, वर्तमान में अतिरिक्त प्रभार के भरोसे चल रहा है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब एमबीबीएस काउंसलिंग और सुपर स्पेशलिटी पाठ्यक्रमों से जुड़े अदालती मामले लंबित हों।

सर्विस डॉक्टर्स एंड पोस्ट ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के महासचिव ए. रामलिंगम ने कहा कि पिछले और वर्तमान दोनों सरकारों ने नियमित नियुक्तियों के बजाय FAC व्यवस्था को एक रूटीन बना दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल 15 मार्च तक योग्य उम्मीदवारों का पैनल तैयार किया जाना चाहिए ताकि रिक्तियों को तुरंत भरा जा सके।

क्या आप जानते हैं?: तमिलनाडु का DME विभाग राज्य के 38 मेडिकल कॉलेजों और उससे जुड़े दर्जनों स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे और शिक्षा नीति को नियंत्रित करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: FAC (Full Additional Charge) क्या है और यह समस्या क्यों है?
FAC का अर्थ है जब एक अधिकारी अपने नियमित कार्य के साथ-साथ किसी अन्य रिक्त पद का कार्यभार संभालता है। इससे कार्यभार बढ़ता है और निर्णय लेने की गति धीमी हो जाती है।

प्रश्न 2: रिक्त पदों का मरीजों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
नेतृत्व की कमी से प्रशासनिक देरी होती है, जिससे आवश्यक उपकरणों की खरीद, स्टाफ की नियुक्ति और विशेष सर्जरी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय समय पर नहीं लिए जा पाते।