अहमदाबाद के ज़ायडस अस्पताल ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करते हुए 300 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट पूरे किए हैं, जिससे यह गुजरात का अग्रणी केंद्र बन गया है।

  • ज़ायडस अस्पताल, अहमदाबाद ने 300 से अधिक सफल लिवर ट्रांसप्लांट पूरे कर गुजरात में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
  • अस्पताल ने लिविंग डोनर, डीसीज्ड डोनर, और ABO-इनकम्पैटिबल जैसे जटिल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की है।
  • गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD) के बढ़ते मामलों के कारण ट्रांसप्लांट की मांग में भारी वृद्धि देखी गई है।

अहमदाबाद स्थित ज़ायडस अस्पताल ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल ने हाल ही में 300 लिवर ट्रांसप्लांट का आंकड़ा पार कर लिया है, जो इसे गुजरात राज्य में सबसे अधिक ट्रांसप्लांट करने वाले संस्थानों की श्रेणी में सबसे ऊपर रखता है। यह उपलब्धि न केवल अस्पताल की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि राज्य में गंभीर लिवर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण भी है।

आज के दौर में गतिहीन जीवनशैली, व्यायाम की कमी और प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते सेवन ने गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD) को जन्म दिया है। आंकड़ों के अनुसार, हर चार वयस्कों में से एक इस बीमारी से प्रभावित है। यदि समय पर इलाज न किया जाए, तो यह स्थिति सूजन (NASH), लिवर के निशान (Scarring), सिरोसिस और अंततः लिवर कैंसर में बदल सकती है।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि लिवर ट्रांसप्लांट एक अत्यंत जटिल प्रक्रिया है जिसमें मल्टी-डिसिप्लिनरी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। ज़ायडस अस्पताल ने लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया, हेपेटोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की एक एकीकृत टीम तैयार की है। यह समन्वय विशेष रूप से उन मामलों में जीवनरक्षक साबित होता है जहाँ लिवर और किडनी दोनों के ट्रांसप्लांट (SLKT) की आवश्यकता होती है।

"लगभग 40% मरीज एक्यूट-ऑन-क्रोनिक लिवर फेल्योर (ACLF) के साथ आते हैं, जिन्हें अस्पताल पहुँचने के 24 से 36 घंटों के भीतर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता होती है।" - डॉ. आनंद खाकर, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन।

अस्पताल की सफलता की कहानियों में एक 12 वर्षीय बालक का मामला उल्लेखनीय है, जिसे जुनागढ़ से गंभीर स्थिति में लाया गया था। वह कोमा में था और वेंटिलेटर पर था। डॉ. आनंद खाकर और उनकी टीम ने जटिलताओं को दूर करते हुए उसकी माँ के माध्यम से सफल ट्रांसप्लांट किया। इसी तरह, एक 22 वर्षीय आर्किटेक्चर छात्र का मामला भी चुनौतीपूर्ण था, जहाँ ब्लड ग्रुप मैच न होने के कारण 'प्लाज्मा एक्सचेंज' और 'स्प्लीनेक्टोमी' (तिल्ली निकालना) जैसी प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीक: डॉ. यश पटेल के अनुसार, ज़ायडस अस्पताल में मॉडुलर एडवांस ओटी (OT), समर्पित लिवर आईसीयू, उन्नत एमआरआई सुविधाएं और फाइब्रोस्कैन इमेजिंग जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं, जो जटिल सर्जरी की सफलता दर को बढ़ाती हैं।

एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि NAFLD केवल अधिक वजन वाले लोगों को ही नहीं, बल्कि सामान्य वजन वाले व्यक्तियों को भी प्रभावित कर सकता है, जिसे 'लीन NASH' कहा जाता है। हाल ही में चंडीगढ़ से एक 37 वर्षीय मरीज को एयरलिफ्ट किया गया, जिसका वजन केवल 43 किलोग्राम था, लेकिन वह गंभीर लिवर रोग से पीड़ित था।

क्या आप जानते हैं?: गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग (NAFLD) अब दुनिया भर में लिवर सिरोसिस का सबसे प्रमुख कारण बनता जा रहा है, जो पहले केवल शराब के सेवन से जुड़ा था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या ABO-इनकम्पैटिबल ट्रांसप्लांट संभव है?
हाँ, ज़ायडस अस्पताल जैसे उन्नत केंद्रों में विशेष प्रोटोकॉल और प्लाज्मा एक्सचेंज के माध्यम से उन मरीजों का भी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है जिनका ब्लड ग्रुप डोनर से मैच नहीं करता।

प्रश्न 2: NAFLD के मुख्य लक्षण क्या हैं?
शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, लेकिन थकान और पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द महसूस हो सकता है। समय पर जांच और जीवनशैली में बदलाव इसे गंभीर होने से रोक सकते हैं।