PLOS मेडिसिन के एक नए अध्ययन से पता चला है कि टाइप 2 डायबिटीज पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग तरह से प्रभावित करती है। महिलाओं में हृदय संबंधी जटिलताओं का जोखिम अधिक पाया गया है, जबकि पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य और मृत्यु दर का संबंध अधिक गहरा है।
- टाइप 2 डायबिटीज वाली महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हृदय संबंधी जटिलताओं का सापेक्ष जोखिम अधिक होता है।
- डायबिटीज के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का विकास समय से पहले मृत्यु के जोखिम को बढ़ा देता है, विशेषकर पुरुषों में।
- बीमारी की गंभीरता जेंडर से ज्यादा ग्लूकोज नियंत्रण और बीमारी की अवधि पर निर्भर करती है।
PLOS मेडिसिन में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है कि टाइप 2 डायबिटीज सभी रोगियों के लिए एक जैसा रास्ता अपनाती है। 2010 और 2020 के बीच यूके में लगभग 29,000 नए निदान किए गए रोगियों पर नज़र रखने के बाद, शोधकर्ताओं ने पाया कि हृदय रोग, किडनी की बीमारी और उच्च रक्तचाप का विकास पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग होता है।
अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष डायबिटीज और मानसिक स्वास्थ्य के बीच का संबंध था। यह पाया गया कि जिन रोगियों को डायबिटीज के बाद मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, उनमें समय से पहले मृत्यु का जोखिम अधिक था। इस समूह में, पुरुष औसतन महिलाओं की तुलना में नौ साल पहले मृत्यु को प्राप्त हुए।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चिकित्सा जगत ने लंबे समय तक डायबिटीज को एक 'जेंडर-न्यूट्रल' बीमारी माना है। महिलाओं में हृदय संबंधी जोखिमों की अधिकता यह संकेत देती है कि वर्तमान जांच प्रणालियाँ महिला रोगियों में हृदय तनाव को कम आंक सकती हैं, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।
ठाणे के किम्स (KIMS) अस्पताल की कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. सुकीर्ति मिश्रा के अनुसार, डायबिटीज दोनों को प्रभावित करती है, लेकिन जटिलताएं अलग होती हैं। जहां महिलाओं को गर्भावस्था और हृदय संबंधी समस्याओं का अधिक सामना करना पड़ता है, वहीं पुरुषों में यौन और प्रजनन संबंधी समस्याएं अधिक देखी जाती हैं।
"डायबिटीज से जुड़ा हृदय रोग का सापेक्ष जोखिम पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक हो सकता है, इसलिए महिलाओं के लिए हृदय स्वास्थ्य की जांच अत्यंत आवश्यक है।"
डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह कहना गलत होगा कि डायबिटीज किसी एक जेंडर में अधिक गंभीर है। बीमारी की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि रोगी ने कितने समय से डायबिटीज का सामना किया है, उसका ब्लड शुगर कितना नियंत्रित है और क्या उसे उच्च रक्तचाप या कोलेस्ट्रॉल जैसी अन्य समस्याएं हैं।
जोखिम को कम करने के लिए, केवल ब्लड शुगर की निगरानी पर्याप्त नहीं है। रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और तंबाकू से परहेज करना अनिवार्य है। नियमित जांच से जटिलताओं का जल्द पता लगाया जा सकता है और समय पर उपचार संभव है।
जेंडर के आधार पर जोखिम तुलना
| जोखिम कारक | महिलाएं | पुरुष |
|---|---|---|
| हृदय रोग जोखिम | अधिक सापेक्ष वृद्धि | महत्वपूर्ण लेकिन कम सापेक्ष वृद्धि |
| प्रजनन स्वास्थ्य | गर्भावस्था जटिलताएं | यौन स्वास्थ्य समस्याएं |
| मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव | बेहतर उत्तरजीविता दर | समय से पहले मृत्यु का उच्च जोखिम |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या महिला होने से डायबिटीज अधिक गंभीर हो जाती है?
नहीं, गंभीरता ग्लूकोज नियंत्रण पर निर्भर करती है, लेकिन महिलाओं में हृदय संबंधी जोखिम अधिक होता है।
प्रश्न 2: डायबिटीज रोगी अपने हृदय के जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं?
सख्त शुगर नियंत्रण, ब्लड प्रेशर मैनेजमेंट, नियमित व्यायाम और तंबाकू के सेवन को पूरी तरह बंद करके।