जम्मू और कश्मीर के एमबीबीएस, बीडीएस और एफएमजीई इंटर्न डॉक्टरों ने अपने मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 30,000 रुपये करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

  • जम्मू-कश्मीर में लगभग 1,700 मेडिकल इंटर्न हड़ताल पर हैं।
  • डॉक्टरों का कहना है कि वे प्रति सप्ताह 80 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं।
  • वर्तमान स्टाइपेंड 2019 से अपरिवर्तित है, जो देश में सबसे कम है।
  • डॉक्टरों ने मौखिक आश्वासन के बजाय लिखित आदेश की मांग की है।

जम्मू और कश्मीर के चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जम्मू स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज के बाहर, एमबीबीएस, बीडीएस और एफएमजीई के प्रशिक्षु डॉक्टरों (इंटर्न) ने अपने बेहद कम मासिक स्टाइपेंड के विरोध में एक अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इन डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनके वर्तमान स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर तत्काल प्रभाव से कम से कम 30,000 रुपये किया जाए।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे सप्ताह में 80 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें प्रतिदिन मात्र 400 रुपये मिल रहे हैं। यह राशि उनके कठिन परिश्रम और चिकित्सा क्षेत्र की जिम्मेदारियों के सामने नगण्य है। डॉक्टरों का तर्क है कि उनका स्टाइपेंड वर्ष 2019 से नहीं बदला गया है, जिससे यह देश के अन्य राज्यों जैसे ओडिशा, असम और दिल्ली के साथ-साथ केंद्रीय संस्थानों जैसे AIIMS विजयपुर की तुलना में सबसे कम हो गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इस तरह के असंतोष का गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यदि प्रशिक्षु डॉक्टर हड़ताल पर रहते हैं, तो अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और आपातकालीन सेवाओं पर सीधा असर पड़ेगा। यह मुद्दा केवल वेतन का नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे युवाओं के आर्थिक सम्मान और भविष्य की स्थिरता का भी है।

चिकित्सा प्रशिक्षुओं का उचित मानदेय न मिलना स्वास्थ्य प्रणाली के भविष्य के लिए एक चेतावनी है।

स्वास्थ्य मंत्री सकीना इतू ने डॉक्टरों की मांगों को जायज माना है और कहा है कि संबंधित फाइल प्रक्रिया में है। हालांकि, हड़ताल पर मौजूद डॉक्टरों ने इस मौखिक आश्वासन को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पिछले तीन वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन धरातल पर कोई बदलाव नहीं हुआ।

वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर के सभी मेडिकल कॉलेजों से लगभग 1,600 से 1,700 इंटर्न इस आंदोलन का हिस्सा हैं। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे तब तक काम पर वापस नहीं लौटेंगे जब तक उन्हें स्टाइपेंड वृद्धि का औपचारिक लिखित आदेश प्राप्त नहीं हो जाता।

Frequently Asked Questions

1. जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टर क्यों हड़ताल कर रहे हैं?
डॉक्टर अपने मासिक स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे हैं।

2. वर्तमान में इंटर्न को कितने घंटे काम करना पड़ता है?
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वे प्रति सप्ताह 80 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं।

Did You Know?: जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों का वर्तमान स्टाइपेंड देश के कई अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम श्रेणियों में आता है।