विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, विकासशील देशों में बच्चों का स्वास्थ्य एक गंभीर संकट से गुजर रहा है, जहाँ कुपोषण के साथ-साथ मोटापे की दर भी खतरनाक रूप से बढ़ रही है।
- पेरू में लड़कों में मोटापे की दर 2010 के 8% से बढ़कर 2024 में 19% हो गई है।
- टोंगा और समोआ में लड़कियों में मोटापे की वृद्धि दर सबसे अधिक दर्ज की गई है।
- विकासशील राष्ट्र अब 'दोहरे बोझ' (कुपोषण और मोटापा) का सामना कर रहे हैं।
हालिया वैश्विक स्वास्थ्य रिपोर्टों ने विकासशील देशों में बच्चों के स्वास्थ्य के संबंध में एक भयावह तस्वीर पेश की है। जो राष्ट्र कभी केवल भोजन की कमी और कुपोषण से जूझ रहे थे, वे अब एक नए और अधिक जटिल संकट का सामना कर रहे हैं: बच्चों में बढ़ता मोटापा। यह बदलाव न केवल स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव डाल रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को भी खतरे में डाल रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा समर्थित एक हालिया परियोजना के अनुसार, पेरू में लड़कों के बीच मोटापे की दर में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2010 में यह दर 8% से भी कम थी, जो 2023-2024 की अवधि के दौरान तेजी से बढ़कर 19% तक पहुंच गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि आहार संबंधी आदतों और जीवनशैली में बदलाव किस तरह से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह समस्या केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। जब बच्चों में मोटापे की दर बढ़ती है, तो यह भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग और अन्य गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बोझ को बढ़ा देता है। विकासशील देशों के लिए, जहाँ स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा पहले से ही सीमित है, यह एक आर्थिक और सामाजिक आपदा बन सकता है।
कुपोषण और मोटापा एक ही सिक्के के दो पहलू बन गए हैं, जो विकासशील देशों के पोषण ढांचे की विफलता को दर्शाते हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर, प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में स्थिति और भी गंभीर है। रिपोर्टों के अनुसार, टोंगा और समोआ में लड़कियों के बीच मोटापे की दर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली दरों में शामिल है। यह इंगित करता है कि वैश्विक खाद्य प्रणालियों में बदलाव और अत्यधिक संसाधित (processed) खाद्य पदार्थों की उपलब्धता इस संकट का मुख्य कारण है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ऐतिहासिक रूप से, विकासशील देशों का मुख्य ध्यान कैलोरी की कमी और भुखमरी को दूर करने पर था। हालांकि, वैश्वीकरण और सस्ते, उच्च कैलोरी वाले अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की आसान पहुंच ने इस परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। अब 'पोषण संबंधी संक्रमण' (Nutritional Transition) के कारण दुनिया के कई हिस्से एक साथ भूख और मोटापे दोनों का सामना कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पेरू में लड़कों में मोटापे की दर में इतनी वृद्धि क्यों हुई?
उत्तर: शहरीकरण, गतिहीन जीवनशैली और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।
प्रश्न 2: टोंगा और समोआ में लड़कियों में मोटापा अधिक क्यों देखा जा रहा है?
उत्तर: स्थानीय आहार पैटर्न में बदलाव और आयातित उच्च-चीनी वाले खाद्य पदार्थों की अधिक उपलब्धता इसके प्रमुख कारण हैं।