जिपमर ने 36 वर्षीय दुर्घटना पीड़ित की मस्तिष्क-स्तर मृत्यु के बाद कई अंगों का दान करके चार गंभीर रोगियों की जान बचाई। दो कोरनेया भी दो दृष्टिहीन रोगियों को दृष्टि प्रदान करेंगे।

  • मल्टी-ऑर्गन दान से चार जीवन बचाए गए
  • दानकर्ता 36 वर्षीय बालासुब्रमण्यम, कुडालोर जिले के निवासी
  • जिपमर ने सार्वजनिक रूप से अंगदान पर चर्चा करने का आह्वान किया

जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) ने एक 36 वर्षीय पुरुष की मस्तिष्क-स्तर मृत्यु के बाद सफलतापूर्वक कई अंगों का दान किया, जिससे चार गंभीर रोगियों की जान बची। यह घटना पुडुचेरी में 3 सितंबर 2026 को रिपोर्ट की गई।

कुडालोर जिले के बालासुब्रमण्यम को 25 अगस्त को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं। जिपमर में आपातकालीन देखभाल और बहु-विषयक टीम द्वारा व्यापक इंटेंसिव केयर के बावजूद, 31 अगस्त को उन्हें मस्तिष्क मृत घोषित किया गया।

परिवार की सहमति के बाद, दाता के दिल, जिगर और दो किडनी को राष्ट्रीय अंग आवंटन प्रणाली के माध्यम से चार गंभीर रोगियों को प्रदान किया गया। साथ ही दो कोरनेया दो दृष्टिहीन रोगियों को दृष्टि बहाल करने में मदद करेंगे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में मृत अंगदान का इतिहास 1990 के दशक से शुरू हुआ, लेकिन सामाजिक मान्यताओं और जागरूकता की कमी के कारण इसकी दर कम रही है। पिछले दो दशकों में सरकारी पहल और सार्वजनिक अभियानों ने इस क्षेत्र में धीरे-धीरे सुधार किया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that multi-organ donations like this significantly narrow the gap between organ demand and supply, especially in regions like Puducherry where transplant waiting lists are long.

"प्रत्येक दानित अंग एक नई जिंदगी का द्वार खोलता है," जिपमर के प्रमुख ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अजय कुमार ने कहा।

जिपमर का सार्वजनिक आह्वान

जिपमर ने परिवारों से अनुरोध किया है कि वे अपने प्रियजनों के साथ अंगदान के महत्व पर चर्चा करें। संस्थान ने कहा कि मृत अंगदान ही ट्रांसप्लांट की सबसे प्रभावी विधि है, जो रोगियों की जीवन गुणवत्ता को तुरंत सुधारती है।

Did You Know?: भारत में हर वर्ष केवल 0.5% मृत अंगों का ही दान किया जाता है, जबकि कई देशों में यह प्रतिशत 20% से अधिक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: मृत अंगदान के लिए किन शर्तों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: दाता को मस्तिष्क-स्तर मृत्यु या हार्ड ब्रेन डैथ का प्रमाण होना चाहिए, और परिवार की स्पष्ट सहमति आवश्यक है।

प्रश्न 2: अंगदान के बाद परिवार को क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: कई संस्थाएँ दाता परिवार को भावनात्मक समर्थन, आर्थिक सहायता और सम्मान समारोह प्रदान करती हैं।