KGMU के विशेषज्ञों और शीर्ष हृदय सर्जनों ने चेतावनी दी है कि भारतीय कम उम्र में हृदय रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं, जिसके लिए तत्काल जीवनशैली परिवर्तन और नियमित जांच की आवश्यकता है।
- भारतीय आनुवंशिक और जीवनशैली के कारण कम उम्र में हृदय रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
- 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक वयस्क को कोलेस्ट्रॉल स्तर की जांच करानी चाहिए।
- गतिहीन जीवनशैली और खान-पान की आदतें युवाओं में हृदय संबंधी जटिलताओं को बढ़ा रही हैं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के चिकित्सा विशेषज्ञों ने भारतीय आबादी में समय से पहले होने वाले हृदय रोगों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, एक परेशान करने वाला रुझान देखा गया है जहाँ हृदय संबंधी जटिलताएँ, जो पहले केवल बुजुर्गों में देखी जाती थीं, अब 30 और 40 की उम्र के व्यक्तियों में दिखाई दे रही हैं।
इस जोखिम का कारण आनुवंशिक प्रवृत्तियों और आधुनिक पर्यावरणीय कारकों का जटिल मिश्रण है। प्रसिद्ध हृदय सर्जन डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी ने जोर देकर कहा है कि भारतीयों के लिए हृदय स्वास्थ्य के प्रति दृष्टिकोण बदलना होगा। उन्होंने पुरजोर वकालत की है कि 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक भारतीय नागरिक को कोलेस्ट्रॉल की व्यापक जांच करानी चाहिए ताकि गंभीर स्थिति आने से पहले जोखिमों की पहचान की जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'एशियन इंडियन फेनोटाइप'—जिसकी विशेषता कम बीएमआई (BMI) के बावजूद शरीर में अधिक वसा का प्रतिशत और उच्च इंसुलिन प्रतिरोध है—भारतीय आबादी को विशिष्ट रूप से संवेदनशील बनाता है। इसका अर्थ है कि हृदय स्वास्थ्य के लिए वैश्विक मानक भारतीयों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं, जिससे आक्रामक शुरुआती स्क्रीनिंग की आवश्यकता बढ़ जाती है।
इसके अलावा, युवाओं में दिल की धड़कन तेज होने (palpitations) की समस्या एक बड़ी चिंता बन गई है। हालांकि अक्सर इसे तनाव या कैफीन का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट चेतावनी देते हैं कि ये लक्षण अंतर्निहित अतालता (arrhythmias) या हृदय की संरचनात्मक समस्याओं के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
"निवारक कार्डियोलॉजी अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि भारतीय युवाओं के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट से बचने की आवश्यकता है।"
शहरी जीवनशैली में शारीरिक सक्रियता की कमी, कॉर्पोरेट वातावरण का उच्च तनाव और प्रोसेस्ड फूड के सेवन ने धमनियों में रुकावट और उच्च रक्तचाप के लिए एक खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि आधुनिक व्यायाम के साथ पारंपरिक आहार संबंधी ज्ञान को जोड़ना ही एकमात्र स्थायी रास्ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: भारतीय वयस्कों को किस उम्र से हार्ट स्क्रीनिंग शुरू करनी चाहिए?
डॉ. देवी प्रसाद शेट्टी सहित विशेषज्ञों का सुझाव है कि 18 वर्ष की आयु से ही कोलेस्ट्रॉल की जांच शुरू कर देनी चाहिए।
प्रश्न 2: युवाओं में दिल की धड़कन तेज होने के क्या कारण हैं?
तनाव एक बड़ा कारक है, लेकिन धड़कन का बढ़ना हृदय संबंधी समस्याओं का संकेत भी हो सकता है, जिसकी जांच कार्डियोलॉजिस्ट से करानी चाहिए।