75 वर्षीय सुशीला बोहरा ने अपने असाधारण योग कौशल और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। उनकी फिटनेस यात्रा यह साबित करती है कि अनुशासन और निरंतरता से उम्र को मात दी जा सकती है।

  • 75 वर्षीय सुशीला बोहरा का योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग रूटीन वायरल।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, वृद्धों के लिए मांसपेशी द्रव्यमान (Muscle Mass) बनाए रखना अनिवार्य है।
  • उम्र केवल एक संख्या है, लेकिन व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

आज के दौर में जहाँ युवा अपनी फिटनेस को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं सुशीला बोहरा ने अपनी उम्र के 75वें पड़ाव पर पहुँचकर पूरी दुनिया को प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में सुशीला न केवल जटिल योगासनों को सहजता से करते दिख रही हैं, बल्कि वे रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और दैनिक स्ट्रेचिंग में भी माहिर हैं। उनकी पोती, डॉ. सिमरन मुनोट ने इंस्टाग्राम पर साझा किया कि सुशीला की दिनचर्या ही उनका वर्कआउट है और उनका अनुशासन ही उनका सबसे बड़ा सप्लीमेंट है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुशीला की यह उपलब्धि केवल संयोग नहीं, बल्कि वर्षों के निरंतर प्रयास का परिणाम है। मुंबई के वोकहार्ट हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गज़नफर पटेल के अनुसार, उम्र अपने आप में यह तय नहीं करती कि कोई व्यक्ति कितना सक्रिय रह सकता है। वास्तव में, मांसपेशियों की ताकत, जोड़ों की गतिशीलता और संतुलन वह असली मानक हैं जो स्वस्थ उम्र बढ़ने (Healthy Ageing) को परिभाषित करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the societal perception of aging is shifting. Sushila's case highlights a critical transition from 'passive aging' to 'active longevity.' In a world where sarcopenia (muscle loss) is seen as inevitable, her routine proves that targeted resistance training can preserve independence and functional strength in senior citizens.

"Strength works hand-in-hand with balance: stronger legs and a stable core can make everyday movements more controlled and potentially reduce the risk of falls."

डॉ. पटेल ने आगे बताया कि डम्बल एक्सरसाइज और सूर्य नमस्कार जैसे अभ्यास वृद्धों के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। जहाँ सूर्य नमस्कार समन्वय और सहनशक्ति को बढ़ाता है, वहीं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग सीढ़ियाँ चढ़ने और कुर्सी से उठने जैसे बुनियादी कार्यों को आसान बनाती है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि हर किसी को इन उन्नत मुद्राओं की नकल नहीं करनी चाहिए।

विशेष रूप से, जिन्हें ऑस्टियोपोरोसिस, रीढ़ की हड्डी की समस्या या चक्कर आने की बीमारी है, उनके लिए गहरे फॉरवर्ड बेंड जैसे आसन खतरनाक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जटिलता से पहले निरंतरता (Consistency before Complexity) पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी नए रूटीन को शुरू करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लेना अनिवार्य है।

अभ्यास का प्रकारमुख्य लाभसावधानी
सूर्य नमस्कारलचीलापन और समन्वयजोड़ों के दर्द में सावधानी
रेजिस्टेंस ट्रेनिंगमांसपेशियों की ताकतसही फॉर्म और वजन का चुनाव
दैनिक स्ट्रेचिंगगतिशीलता (Mobility)अत्यधिक खिंचाव से बचें
Did You Know?: मांसपेशियों का नुकसान (Sarcopenia) 40 वर्ष की आयु के बाद शुरू हो जाता है, लेकिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के जरिए इसे काफी हद तक धीमा किया जा सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या 70 वर्ष के बाद भारी व्यायाम शुरू करना सुरक्षित है?
उत्तर: केवल तभी जब आप चिकित्सकीय जांच करवा लें। हल्के वजन और नियंत्रित गतिविधियों से शुरुआत करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

प्रश्न 2: वृद्धों के लिए सबसे प्रभावी व्यायाम कौन सा है?
उत्तर: एरोबिक गतिविधियों, मांसपेशियों की मजबूती और संतुलन-केंद्रित अभ्यासों का मिश्रण सबसे प्रभावी माना जाता है।