त्योहारी सीजन में मिलावटी मिठाइयों पर छापेमारी तो होती है, लेकिन खाद्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि असली खतरा उन कानूनी रूप से निर्मित अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक्स में है जो शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं।

  • त्योहारी सीजन में भारी मात्रा में मिलावटी मिठाइयों और नकली घी को नष्ट किया जा रहा है।
  • मौजूदा खाद्य कानून केवल 'मिलावट' (adulteration) को पकड़ने में सक्षम है, 'डिजाइन' (design) को नहीं।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कानूनी रूप से सुरक्षित हो सकते हैं, लेकिन पोषण के लिहाज से बेहद खतरनाक हैं।

हाल ही में प्रयागराज में बुलडोजर द्वारा 10,000 किलोग्राम से अधिक मिठाइयों को कुचल दिया गया, जबकि हैदराबाद और ओडिशा में भी भारी मात्रा में दूषित खाद्य सामग्री जब्त की गई। यह दृश्य हमें आश्वस्त करता है कि खाद्य निरीक्षक अपना काम कर रहे हैं। लेकिन एक खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ (Food Technologist) के रूप में, एक बड़ा सवाल उठता है: क्या हम सही दिशा में देख रहे हैं?

मिलावट: एक पुराना और स्पष्ट खतरा

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत, खाद्य पदार्थों को असुरक्षित तब माना जाता है जब उनमें कोई प्रतिबंधित पदार्थ मिलाया जाता है। जैसे दूध में डिटर्जेंट, घी में वनस्पति तेल, या मिठाई में कपड़ा ब्लीच। यह 'मिलावट' है। यह एक स्पष्ट अपराध है जिसे प्रयोगशाला में आसानी से पकड़ा जा सकता है। सोडियम फॉर्मलडिहाइड सल्फोक्सिलेट जैसे खतरनाक रसायनों का उपयोग दूध के रंग को सफेद करने के लिए किया जा रहा है, जो कैंसरकारी हो सकते हैं। इन पर छापेमारी और कार्रवाई बिल्कुल सही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में खाद्य सुरक्षा का पूरा ढांचा 'क्या नहीं होना चाहिए' पर आधारित है, न कि 'क्या होना चाहिए' पर। जब हम केवल मिलावट पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो हम उस बड़े खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं जो आधुनिक खाद्य इंजीनियरिंग का हिस्सा है।

खाद्य कानून का वर्तमान स्वरूप 19वीं सदी के निरीक्षक की मानसिकता पर आधारित है, जो केवल बाहरी धोखे को पकड़ने के लिए बनाया गया है। यह कानून उस प्रश्न का उत्तर देने में असमर्थ है: यदि किसी उत्पाद में कोई भी अवैध सामग्री नहीं है, फिर भी वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, तो क्या होगा?

खाद्य इंजीनियरिंग का उद्देश्य अब पोषण नहीं, बल्कि स्वाद और लंबे समय तक टिकने की क्षमता (shelf life) को अधिकतम करना बन गया है।

डिजाइन का खतरा: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड

अब जरा उन चमकदार, एयर-कंडीशनर वाले स्टोर के गलियारों में देखें। वहां रखे पैकेटों में कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं होता। उनमें इस्तेमाल होने वाले इमल्सीफायर, रंग और प्रिजर्वेटिव्स कानूनी सीमाओं के भीतर होते हैं। वे हर सरकारी टेस्ट में पास हो जाएंगे। लेकिन, वे 'अल्ट्रा-प्रोसेस्ड' हैं।

ये स्नैक्स फैट, शुगर और नमक के एक ऐसे घातक संयोजन के लिए 'डिजाइन' किए जाते हैं जो अत्यधिक स्वादिष्ट हों और लंबे समय तक खराब न हों। इसे पोषण विज्ञान में NOVA वर्गीकरण के तहत रखा गया है। यहाँ समस्या 'प्रोसेसिंग' नहीं है, बल्कि 'प्रोसेसिंग का उद्देश्य' है।

विशेषतामिलावटी मिठाई (Adulterated Sweet)अल्ट्रा-प्रोसेस्ड स्नैक (Ultra-processed Snack)
कानूनी स्थितिअवैध और आपराधिकपूरी तरह से कानूनी
खतरातत्काल/तीव्र (Acute)दीर्घकालिक/धीमा (Chronic)
पहचानप्रयोगशाला परीक्षण द्वारा आसानपोषण संबंधी विश्लेषण द्वारा कठिन
Did You Know?: कुछ औद्योगिक ब्लीचिंग एजेंट जो मिठाइयों में पाए जाते हैं, वे WHO द्वारा वर्गीकृत सबसे खतरनाक कैंसरकारी पदार्थों में से एक हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या प्रोसेस्ड फूड हमेशा बुरा होता है?
नहीं, पाश्चुरीकरण और फ्रीजिंग जैसे प्रसंस्करण खाद्य सुरक्षा और पोषण बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 2: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और मिलावट में क्या अंतर है?
मिलावट में अवैध पदार्थ मिलाए जाते हैं, जबकि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड कानूनी रूप से स्वीकृत सामग्री का उपयोग करके शरीर के लिए हानिकारक बनाया जाता है।