चेन्नई के सिम्स अस्पताल ने अमेरिका और ब्रिटेन के दो मरीजों पर एक क्रांतिकारी 'बोन-स्पेरिंग' हिप प्रोसीजर सफलतापूर्वक पूरा किया है, जो प्राकृतिक हड्डी को सुरक्षित रखते हुए गतिशीलता बहाल करता है।
- सिम्स अस्पताल ने USA और UK के मरीजों के लिए उन्नत हिप रिसर्फेसिंग तकनीक का उपयोग किया।
- यह प्रक्रिया पारंपरिक हिप रिप्लेसमेंट के विपरीत प्राकृतिक हड्डी को संरक्षित करती है।
- हाई-डेंसिटी पॉलीथीन इम्प्लांट्स के उपयोग से एथलेटिक गतिविधियों की वापसी संभव हुई है।
चेन्नई स्थित सिम्स (SIMS) अस्पताल के सर्जनों ने चिकित्सा जगत में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए दो अंतरराष्ट्रीय मरीजों की सफल 'बोन-स्पेरिंग' हिप प्रोसीजर (Bone-sparing hip procedure) की है। इन मरीजों में एक 44 वर्षीय अमेरिकी नागरिक और एक 58 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक शामिल थे, जो अपनी सक्रिय जीवनशैली और एथलेटिक क्षमता को बनाए रखने के लिए दुनिया भर में इस उन्नत विकल्प की तलाश कर रहे थे।
पारंपरिक हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी में अक्सर हड्डी का एक बड़ा हिस्सा हटाना पड़ता है, जिससे रिकवरी में समय लगता है और भविष्य में रिवीज़न सर्जरी की जटिलताएं बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, यह नई तकनीक रोगी की स्वस्थ प्राकृतिक हड्डी के एक बड़े हिस्से को सुरक्षित रखती है, जिससे जोड़ की स्थिरता और कार्यक्षमता बनी रहती है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह सफलता भारत को विशेष रूप से तमिलनाडु को वैश्विक चिकित्सा पर्यटन (Medical Tourism) के केंद्र के रूप में स्थापित करती है। जब विकसित देशों के मरीज जटिल सर्जरी के लिए भारत का रुख करते हैं, तो यह न केवल भारतीय स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि लागत-प्रभावशीलता और नवाचार के संगम को भी प्रमाणित करता है।
ऑर्थोपेडिक्स के वरिष्ठ सलाहकार विजय सी. बोस ने बताया कि हिप जॉइंट एक बॉल और सॉकेट जॉइंट होता है, जो गठिया या चोट के कारण क्षतिग्रस्त हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले 'मेटल-ऑन-मेटल' इम्प्लांट्स का उपयोग किया जाता था, लेकिन सुरक्षा चिंताओं के कारण उन्हें दुनिया भर में बंद कर दिया गया था। अब, तमिलनाडु में लॉन्च किए गए हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (High Density Polyethylene) इम्प्लांट्स ने इस कमी को पूरा किया है।
"हमारा लक्ष्य केवल दर्दनाक जोड़ को बदलना नहीं था, बल्कि हिप की प्राकृतिक यांत्रिकी का सम्मान करते हुए रोगी की अपनी हड्डी को अधिकतम संभव सीमा तक संरक्षित करना था।"
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हड्डी की मूल आकृति और एनाटॉमी को बनाए रखती है, जिससे मरीज प्रतिस्पर्धी खेलों और उच्च शारीरिक गतिविधियों में वापस लौट सकते हैं। एसआरएम ग्रुप के अध्यक्ष रवि पचमुथु ने इस अवसर पर कहा कि भारत और तमिलनाडु तेजी से एक ग्लोबल मेडिकल हब के रूप में उभर रहे हैं।
| विशेषता | पारंपरिक हिप रिप्लेसमेंट | बोन-स्पेरिंग रिसर्फेसिंग |
|---|---|---|
| हड्डी का नुकसान | अधिक (Extensive removal) | न्यूनतम (Preserves bone) |
| गतिशीलता | सीमित/सामान्य | उच्च/एथलेटिक |
| इम्प्लांट सामग्री | मेटल/सिरामिक | हाई-डेंसिटी पॉलीथीन |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: बोन-स्पेरिंग प्रोसीजर सामान्य सर्जरी से कैसे अलग है?
उत्तर: यह प्रक्रिया हड्डी को काटने के बजाय केवल क्षतिग्रस्त सतह को बदलती है, जिससे प्राकृतिक हड्डी सुरक्षित रहती है।
प्रश्न 2: क्या यह सर्जरी एथलीटों के लिए उपयुक्त है?
उत्तर: हाँ, यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिज़ाइन की गई है जो सर्जरी के बाद फिर से खेल और उच्च शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय होना चाहते हैं।