एक दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले 22 वर्षीय कलैरासन जेयपंडी के परिवार ने उनके अंगों का दान करने का साहसी निर्णय लिया। उनके इस निस्वार्थ कदम से मदुरै और चेन्नई के कई गंभीर मरीजों को जीवन का दूसरा मौका मिला है।
- 22 वर्षीय कलैरासन जेयपंडी के हृदय, लीवर, फेफड़े, किडनी और कॉर्निया का दान किया गया।
- मृतक एक निजी बैंक कर्मचारी थे, जिनकी सड़क दुर्घटना में गंभीर सिर की चोट के कारण मृत्यु हुई।
- मीनाक्षी मिशन अस्पताल और विभिन्न शहरों के बीच समन्वय से प्रत्यारोपण प्रक्रिया पूरी हुई।
एक हृदयविदारक त्रासदी के बीच मानवता की मिसाल पेश करते हुए, कलैरासन जेयपंडी के परिवार ने अपने गहरे दुख को दूसरों के लिए आशा की किरण में बदल दिया। 5 सितंबर को बटलगुंडु में एक सड़क दुर्घटना के दौरान, कलैरासन (जो मोटरसाइकिल पर पीछे बैठे थे) के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उनके परिवार ने उनके अंगों के दान करने का निर्णय लिया।
कलैरासन को पहले डिंडिगुल सरकारी अस्पताल ले जाया गया और बाद में उन्हें मीनाक्षी मिशन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (MMHRC) रेफर किया गया। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल द्वारा काउंसलिंग किए जाने के बाद, उनके माता-पिता इस बात से सहमत हुए कि उनके बेटे के अंग अन्य गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं।
चिकित्सीय प्रोटोकॉल के अनुसार 'ब्रेन स्टेम डेथ' की पुष्टि होने के बाद, सर्जिकल टीम ने अंगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की। दान किए गए अंगों में हृदय, दोनों फेफड़े, दो किडनी, स्प्लिट लीवर और कॉर्निया शामिल थे, जिन्हें मदुरै, चेन्नई और अन्य केंद्रों के अस्पतालों में भेजा गया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में अंगों की मांग की तुलना में दान की दर अभी भी बहुत कम है, जिसका मुख्य कारण सामाजिक भ्रांतियां और जागरूकता की कमी है। कलैरासन जैसे मामले अस्पताल की काउंसलिंग और पारिवारिक समर्थन की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हैं। यह कार्य न केवल जीवन बचाता है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।
अंगदान परोपकार का सर्वोच्च रूप है, जो भारी व्यक्तिगत क्षति के क्षण को कई अन्य परिवारों के लिए चमत्कार में बदल देता है।
इस गरिमामयी अवसर पर डिंडिगुल जिले के राजस्व मंडल अधिकारी के नेतृत्व में सरकारी अधिकारियों ने मृतक को अंतिम श्रद्धांजलि दी। MMHRC के मेडिकल डायरेक्टर बी. कन्नन और अन्य डॉक्टरों ने भी परिवार के इस निस्वार्थ निर्णय की सराहना की।
इस पूरी प्रक्रिया में ट्रांसप्लांट समन्वयकों, पुलिस कर्मियों और राजस्व विभाग के अधिकारियों के बीच बेहतरीन तालमेल देखा गया। यह ऑपरेशन तमिलनाडु में आपातकालीन अंग निष्कर्षण और परिवहन के लिए उपलब्ध चिकित्सा बुनियादी ढांचे की दक्षता को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रेन स्टेम डेथ क्या है?
ब्रेन स्टेम डेथ मस्तिष्क और ब्रेन स्टेम के सभी कार्यों की अपरिवर्तनीय हानि है, जो सांस लेने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है। अंगदान के लिए इसे कानूनी रूप से मृत्यु माना जाता है।
मृत्यु के बाद किन अंगों का दान किया जा सकता है?
सामान्यतः हृदय, फेफड़े, लीवर, किडनी, अग्न्याशय और आंतों का दान किया जाता है, साथ ही कॉर्निया और त्वचा जैसे ऊतकों का भी दान संभव है।