श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SRIHER) के परिसर में नेत्रदान के महत्व को बढ़ावा देने के लिए एक विशाल वॉकथॉन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 500 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लेकर समाज को दृष्टि दान के प्रति जागरूक किया।

  • SRIHER परिसर में 500 से अधिक छात्रों और संकाय सदस्यों ने हिस्सा लिया।
  • नेत्रदान के महत्व को समझाने के लिए स्लोगन और तख्तियों का उपयोग किया गया।
  • विशेषज्ञों ने मृत्यु के बाद तुरंत अस्पताल को सूचित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

चेन्नई के प्रमुख चिकित्सा संस्थान, श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च (SRIHER) के परिसर में सोमवार को एक महत्वपूर्ण नेत्रदान जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में नेत्रदान की कमी को दूर करना और लोगों को दृष्टि दान के माध्यम से दूसरों के जीवन में रोशनी लाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

इस वॉकथॉन में संस्थान के 500 से अधिक छात्रों और संकाय सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने हाथों में रंगीन तख्तियां (placards) थामी हुई थीं और विभिन्न नारों के माध्यम से नेत्रदान के महत्व का संदेश दिया। कार्यक्रम में श्री रामचंद्र एजुकेशनल एंड हेल्थ ट्रस्ट की ट्रस्टी, संयुक्ता वेंकटचलम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं, जिन्होंने इस नेक पहल की सराहना की।

नेत्रदान की प्रक्रिया और परिवार की भूमिका

नेत्रदान की तकनीकी बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए, नेत्र विज्ञान विभाग की प्रमुख समरापुरी ए. ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु साझा किया। उन्होंने बताया कि केवल नेत्रदान की शपथ लेना ही पर्याप्त नहीं है; यह अनिवार्य है कि व्यक्ति अपने परिवार के सदस्यों को इस निर्णय के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि मृत्यु के तुरंत बाद अस्पताल को सूचित करना कॉर्निया प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि समय बीतने के साथ कॉर्निया की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

नेत्रदान के लिए परिवार का सहयोग और समय पर सूचना देना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में कॉर्नियल अंधापन की दर काफी अधिक है, और जागरूकता की कमी के कारण कई संभावित दानकर्ता पीछे रह जाते हैं। SRIHER जैसे संस्थानों द्वारा किए जा रहे ऐसे अभियान न केवल चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देते हैं, बल्कि सामाजिक मानदंडों को बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अभियान में संस्थान की कुलपति उमा शेखर, कॉर्निया विशेषज्ञ एस. गायत्री, सहित कई डॉक्टर, नर्स और छात्र शामिल हुए। सभी ने मिलकर नेत्रदान को एक स्वैच्छिक और महान कार्य के रूप में स्थापित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

Did You Know?: एक एकल नेत्रदानकर्ता दो व्यक्तियों को दृष्टि प्रदान कर सकता है, जिससे उनके जीवन में नया उजाला आ सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नेत्रदान के लिए क्या आयु सीमा है?
उत्तर: नेत्रदान के लिए कोई निश्चित आयु सीमा नहीं है, लेकिन कॉर्निया की गुणवत्ता स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

प्रश्न 2: क्या नेत्रदान के बाद चेहरे की बनावट बदल जाती है?
उत्तर: नहीं, नेत्रदान एक बहुत ही सूक्ष्म प्रक्रिया है जिससे चेहरे की सुंदरता या बनावट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।