पीजीआईएमईआर ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 मनाया, जिसमें कार्डियोवैस्कुलर रोगों और स्ट्रोक के बाद रिकवरी में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

  • पीजीआईएमईआर ने विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 के अवसर पर विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।
  • कार्डियोवैस्कुलर रोगों और स्ट्रोक के रोगियों के लिए फिजियोथेरेपी को रिकवरी का मुख्य आधार बताया गया।
  • स्वास्थ्य संस्थानों ने फिजियोथेरेपी इकाइयों के विस्तार और आधुनिक बुनियादी ढांचे की योजना साझा की।

पीजीआईएमईआर (PGIMER) ने हाल ही में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस 2026 को अत्यंत उत्साह और पेशेवर प्रतिबद्धता के साथ मनाया। इस आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य समाज में फिजियोथेरेपी के महत्व को रेखांकित करना और यह बताना था कि कैसे यह चिकित्सा पद्धति केवल मांसपेशियों के दर्द तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन रक्षक रिकवरी का एक अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम के दौरान, विशेषज्ञों ने विशेष रूप से कार्डियोवैस्कुलर रोगों और स्ट्रोक (Stroke) के बाद होने वाले पक्षाघात के उपचार पर ध्यान केंद्रित किया। यह चर्चा की गई कि कैसे लक्षित व्यायाम और गतिशीलता प्रशिक्षण रोगियों को उनके खोए हुए कार्यों को पुनः प्राप्त करने और उन्हें स्वतंत्र जीवन जीने में मदद करते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में गैर-संचारी रोगों (NCDs) के बढ़ते मामलों के कारण, फिजियोथेरेपी अब एक वैकल्पिक उपचार के बजाय एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। स्वास्थ्य प्रणालियों का झुकाव अब केवल दवाइयों के बजाय समग्र पुनर्वास (Holistic Rehabilitation) की ओर बढ़ रहा है।

"फिजियोथेरेपी केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह शरीर की कार्यक्षमता को पुनः प्राप्त करने का एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है, जो स्ट्रोक के मरीजों के लिए वरदान साबित होता है।"

इस अवसर पर केवल पीजीआईएमईआर ही नहीं, बल्कि RIMS और UHSR जैसे अन्य प्रमुख संस्थानों ने भी अपनी गतिविधियां तेज की हैं। RIMS ने अपनी फिजियोथेरेपी इकाई के विस्तार की घोषणा की है, ताकि अधिक से अधिक मरीजों को उन्नत सुविधाएं मिल सकें। वहीं UHSR ने फिटनेस संदेशों के माध्यम से युवाओं को सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

ऐतिहासिक रूप से, फिजियोथेरेपी को अक्सर केवल खेल चोटों से जोड़ा जाता था, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने इसे हृदय रोग, तंत्रिका विज्ञान (Neurology) और वृद्धावस्था देखभाल के केंद्र में ला खड़ा किया है। आज के समय में, मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच के बिना किसी भी गंभीर बीमारी का पूर्ण उपचार संभव नहीं है।

क्या आप जानते हैं?: फिजियोथेरेपी न केवल शारीरिक रिकवरी में मदद करती है, बल्कि यह मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी को भी उत्तेजित करती है, जिससे स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क नए तंत्रिका पथ बना पाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: स्ट्रोक रिकवरी में फिजियोथेरेपी कैसे मदद करती है?
उत्तर: यह मांसपेशियों की जकड़न को कम करती है, संतुलन में सुधार करती है और न्यूरो-मस्कुलर पुन: शिक्षा के माध्यम से रोगी को चलने-फिरने में सक्षम बनाती है।

प्रश्न 2: क्या फिजियोथेरेपी हृदय रोगों के लिए प्रभावी है?
उत्तर: हाँ, कार्डियक रिहैबिलिटेशन के माध्यम से यह हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है और भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक के जोखिम को कम करती है।