चेन्नई के अपोलो अस्पताल ने मको स्मार्टरोबोटिक्स (Mako SmartRobotics) तकनीक को अपनाया है, जो घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण सर्जरी में सटीकता और रिकवरी की गति को बढ़ाएगा।

  • अपोलो अस्पताल, ग्रीम्स रोड ने स्ट्राइकर के मको स्मार्टरोबोटिक्स (Mako SmartRobotics) को लागू किया है।
  • 3D CT इमेजिंग के माध्यम से सर्जरी से पहले विस्तृत योजना बनाना संभव हुआ है।
  • यह तकनीक पूर्ण और आंशिक घुटने के प्रत्यारोपण के साथ-साथ कूल्हे के प्रत्यारोपण में भी सहायक है।

चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल (ग्रीम्स रोड) ने अपने ऑर्थोपेडिक कार्यक्रम का विस्तार करते हुए एक अत्याधुनिक रोबोटिक सहायता प्रणाली की शुरुआत की है। यह नई तकनीक मुख्य रूप से घुटने और कूल्हे के रिप्लेसमेंट की जटिल प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए डिज़ाइन की गई है।

इस प्रणाली के केंद्र में स्ट्राइकर (Stryker) का 'मको स्मार्टरोबोटिक्स' है। यह तकनीक केवल सर्जरी के दौरान ही काम नहीं करती, बल्कि सर्जरी से पहले 3D CT इमेजिंग का उपयोग करके मरीज की शारीरिक संरचना का विस्तृत विश्लेषण करती है। इससे सर्जनों को हड्डी की तैयारी और इम्प्लांट की सटीक स्थिति निर्धारित करने में मदद मिलती है, जिससे मानवीय त्रुटि की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि रोबोटिक सर्जरी का एकीकरण स्वास्थ्य सेवा में एक बड़े बदलाव का संकेत है। पारंपरिक सर्जरी के विपरीत, जहां सर्जन केवल अपने अनुभव और दृश्यता पर निर्भर होते हैं, यह प्रणाली डेटा-संचालित सटीकता प्रदान करती है। इससे न केवल सर्जरी का समय कम होता है, बल्कि मरीज के ठीक होने की अवधि (recovery period) में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।

रोबोटिक सहायता हमें यह समझने में मदद करती है कि प्रत्येक विशिष्ट रोगी के लिए सर्जरी को कैसे अनुकूलित किया जाए ताकि सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त हों।

सर्जरी के दौरान, एक रोबोटिक आर्म सर्जन को पहले से तय की गई योजना को लागू करने में सहायता करती है। हालांकि, यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि रोबोट केवल एक सहायक उपकरण है; अंतिम निर्णय और सर्जिकल निर्णय पूरी तरह से अनुभवी सर्जन के हाथ में ही रहते हैं।

अपोलो अस्पताल के चेन्नई क्षेत्र के सीईओ इलांकुमारन कलियामूर्ति ने कहा कि उन्नत तकनीक को अपनाना अस्पताल के उस प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत चिकित्सकों को सर्जिकल देखभाल में सर्वोत्तम संभव सहायता प्रदान की जा सके। इस उपलब्धि के अवसर पर वरिष्ठ रोबोटिक सर्जनों, जिनमें अरुण कन्नन और कुणाल पटेल शामिल हैं, ने अपने विचार साझा किए।

क्या आप जानते हैं?: रोबोटिक-असिस्टेड सर्जरी में उपयोग किए जाने वाले 3D मॉडल सर्जन को सर्जरी शुरू करने से पहले ही यह बता देते हैं कि इम्प्लांट का सटीक कोण क्या होना चाहिए, जिससे भविष्य में घुटने के ढीले होने का खतरा कम हो जाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या रोबोट खुद सर्जरी करता है?
नहीं, रोबोट केवल सर्जन की सहायता करता है। सभी महत्वपूर्ण निर्णय और नियंत्रण सर्जन के पास ही होते हैं।

प्रश्न 2: इस तकनीक का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ अत्यधिक सटीकता, कम रक्तस्राव और मरीज की तेजी से रिकवरी है।