स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने परिवारों, शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से मानसिक तनाव के शुरुआती संकेतों को पहचानने और लोगों को सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।
- मंत्री सत्य कुमार यादव ने जोर दिया कि आत्महत्या रोकना केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
- आशा (ASHA) और एएनएम (ANM) जैसे फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को मानसिक स्वास्थ्य संकेतों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
- 2023-2025 के बीच 76,000 से अधिक छात्रों तक जागरूकता अभियान पहुँचाया गया।
- IIIT-नुज़विद में पायलट प्रोजेक्ट के सफल कार्यान्वयन के बाद आत्महत्या के मामले शून्य हो गए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, स्वास्थ्य, चिकित्सा और परिवार कल्याण मंत्री सत्य कुमार यादव ने राज्य के नागरिकों से आत्महत्या के खिलाफ एक सामूहिक कवच बनाने का आह्वान किया है। 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए एक बयान में, मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी नीतियां केवल एक ढांचा प्रदान करती हैं, लेकिन वास्तविक रोकथाम घर, कक्षा और सामुदायिक क्लीनिकों के भीतर होती है।
मंत्री की रणनीति 'प्रारंभिक पहचान' मॉडल पर केंद्रित है। सहायक नर्स मिडवाइव्स (ANMs) और मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHAs) को सशक्त बनाकर, सरकार का लक्ष्य मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग को सबसे कमजोर आबादी के दरवाजे तक पहुँचाना है। इन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को अब उन व्यवहारिक बदलावों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया है जो अक्सर संकट से पहले आते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानसिक स्वास्थ्य के बोझ को विशेष अस्पतालों से हटाकर सामुदायिक जागरूकता की ओर ले जाना ही आत्महत्या की दरों को कम करने का एकमात्र स्थायी तरीका है। शैक्षणिक पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को एकीकृत करके, सरकार मदद मांगने के कलंक (stigma) को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
इस आउटरीच का पैमाना काफी व्यापक रहा है। 2023 और 2025 के बीच, राज्य ने स्कूलों में 463 और कॉलेजों में 308 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इस व्यापक अभियान के माध्यम से लगभग 40,740 स्कूली छात्रों और 35,598 कॉलेज छात्रों तक पहुँचा गया, जिससे जागरूक साथियों और शिक्षकों का एक सुरक्षा जाल तैयार हुआ है।
"प्रतिक्रियात्मक उपचार से हटकर सक्रिय सामुदायिक पहचान की ओर बढ़ना आधुनिक आत्महत्या रोकथाम रणनीतियों की आधारशिला है।"
सबसे उल्लेखनीय सफलता IIIT-नुज़विद में लागू पायलट कार्यक्रम की रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि 2022 में चार और 2023 में एक मामले के बाद, 2024, 2025 और 2026 में अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। इस सफलता को देखते हुए, सरकार ने मुख्य शहरों से दूर अलग-थलग क्षेत्रों में स्थित अन्य शिक्षण संस्थानों में भी इसी तरह की पहल करने का निर्णय लिया है।
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर, विभाग ने 'स्टार्ट द कन्वर्सेशन' फोटो अभियान और विभिन्न रैलियों की योजना बनाई है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मानसिक बीमारी के इर्द-गिर्द चुप्पी को तोड़ना और लोगों को संकट सहायता के लिए Tele-MANAS टोल-फ्री नंबर (14416) का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार आत्महत्या रोकने के लिए कौन जिम्मेदार है?
उत्तर: मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा कि यह परिवारों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और सरकार सहित एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रश्न 2: IIIT-नुज़विद पायलट कार्यक्रम का क्या परिणाम रहा?
उत्तर: इस कार्यक्रम ने 2024, 2025 और 2026 में आत्महत्या के मामलों को शून्य कर दिया, जिससे अलग-थलग परिसरों में लक्षित परामर्श की प्रभावशीलता सिद्ध हुई।