ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने राज्यसभा सांसद अजीत गोपचड़े को पत्र लिखकर देश में 'वन हेल्थ मिशन' की प्रगति और बायो-सिक्योरिटी उपायों की विस्तृत जानकारी दी है। इस पहल का उद्देश्य उभरते संक्रामक रोगों और जैव-आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना है।

  • वन हेल्थ मिशन के तहत मानव, पशु और वन्यजीवों की एकीकृत निगरानी शुरू।
  • 47 शहरों से बढ़ाकर 2027 तक 75 शहरों में वेस्ट-वाटर सर्विलांस का विस्तार होगा।
  • अज्ञात रोगजनकों (Pathogens) की पहचान के लिए 5 जीनोमिक और मेटाजेनोमिक हब स्थापित।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने राज्यसभा सदस्य अजीत गोपचड़े को एक औपचारिक पत्र भेजकर भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा तैयारियों पर प्रकाश डाला है। यह पत्र सांसद द्वारा जैव-आतंकवाद (Bioterrorism), जैविक युद्ध (Bio-warfare) और प्रयोगशाला-आधारित जैविक दुर्घटनाओं से निपटने के लिए एक समयबद्ध राष्ट्रीय जैव-सुरक्षा और जैव-रक्षा रणनीति की मांग के जवाब में लिखा गया है।

डॉ. बहल ने स्पष्ट किया कि नेशनल वन हेल्थ मिशन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इनमें सिंड्रोमिक सर्विलांस और एकीकृत पशु-मानव-वन्यजीव निगरानी शामिल है, ताकि ज़ूनोटिक रोगों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों) का समय रहते पता लगाया जा सके।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि कोविड-19 महामारी के बाद भारत अपनी स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को 'रिएक्टिव' से 'प्रोएक्टिव' मोड में बदल रहा है। वेस्ट-वाटर सर्विलांस (अपशिष्ट जल निगरानी) एक गेम-चेंजर तकनीक है, जिससे बिना व्यक्तिगत परीक्षण के पूरे शहर में किसी विशेष वायरस या बैक्टीरिया की मौजूदगी का पता लगाया जा सकता है।

"वन हेल्थ दृष्टिकोण केवल एक स्वास्थ्य रणनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है क्योंकि भविष्य की महामारियां वन्यजीवों और मनुष्यों के बीच के धुंधले होते अंतर से पैदा होंगी।"

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 13 प्राथमिकता वाले रोगजनकों की निगरानी वर्तमान में 47 शहरों में की जा रही है, जिसे 2027 तक बढ़ाकर 75 शहरों तक ले जाया जाएगा। इसके अलावा, अज्ञात या नए रोगजनकों का पता लगाने की क्षमता को मजबूत करने के लिए देश भर में पांच जीनोमिक और मेटाजेनोमिक हब स्थापित किए गए हैं।

राष्ट्रीय जैव-सुरक्षा नीति के मसौदे पर गृह मंत्रालय (MHA) विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि एक मजबूत कानूनी और तकनीकी ढांचा तैयार किया जा सके जो भारत को किसी भी जैविक खतरे से सुरक्षित रख सके।

विशेषतावर्तमान स्थिति (2026)लक्ष्य (2027)
वेस्ट-वाटर सर्विलांस शहर47 शहर75 शहर
निगरानी फोकसप्राथमिकता वाले 13 रोगजनकविस्तारित रोगजनक सूची
बुनियादी ढांचा5 जीनोमिक हबनेटवर्क का सुदृढ़ीकरण
क्या आप जानते हैं?: वेस्ट-वाटर सर्विलांस में सीवर के पानी का विश्लेषण किया जाता है, जिससे यह पता चलता है कि किसी विशेष क्षेत्र में कौन सी बीमारी फैल रही है, वह भी मरीजों के अस्पताल पहुँचने से पहले।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. वन हेल्थ मिशन क्या है?
यह एक एकीकृत दृष्टिकोण है जो यह मानता कि मनुष्यों, जानवरों और पर्यावरण का स्वास्थ्य आपस में जुड़ा हुआ है, और तीनों की निगरानी एक साथ होनी चाहिए।

2. जीनोमिक हब का क्या कार्य है?
ये हब वायरस और बैक्टीरिया के जेनेटिक कोड का विश्लेषण करते हैं ताकि नए म्यूटेशन या अज्ञात वायरस की पहचान तुरंत की जा सके।